8 दिसंबर, आज जॉन लेनन की 39 वीं पुण्‍यतिथि पर विशेष

________

John Lennon Death Anniversary : The Beatles आज ही के दिन 1980 में न्यूयार्क में सुबह के वक्त John Lennon को उनके अपार्टमेंट के बाहर उनके ही प्रशंसक मार्क डेविड चैपमैन ने गोलियों से भून दिया था। इसकी वजह केवल इतनी थी लेकिन मार्क मशहूर होना चाहता था और उसने इसकी कीमत लेनन जैसे कीमती आदमी के रूप में ली। इस तरह धरती से एक और जीनियस चला गया।

जॉन लेनन का परिचय केवल बडे रॉकस्टार के तौर पर ही नहीं है, एक एक्टिविस्ट, चिंतक, विचारक, सांग राइटर, म्यूजीशियन और गजब के सिंगर के तौर पर भी है। लेकिन ये खूबियां तो खूब सारे लोगों में है, लेकिन वो चीज क्या है जो लेनन को लेनन बनाती है, वह है उनके भीतर का जीनियस।

उनके भीतर का बिरला। उनके एक प्रशंसक ने सांग मीनिंग वेबसाइट पर टिप्पणी की है कि— जॉन इजीलि डिसाइडेड टू क्विट द स्टुपिड माउस—रेस ऑफ वर्ल्‍ड, रादर देन टू पार्टिसिपेट दिस! यानी, जॉन लेनन इस दुनिया की चूहादौड़ या भेडचाल का हिस्सा नहीं बने। उन्होंने आसानी से खुद को इससे अलग कर दिया।

वैसे, यह है भी सच! उनके बचपन का मशहूर किस्सा है जो कई—कई बार छप चुका है! स्कूल में टीचर ने बालक जॉन से पूछा कि बडे होकर तुम क्या बनना चाहते हो! लेनन का जवाब था—बडे होकर मैं खुश होना चाहूंगा।

टीचर ने कहा कि शायद तुम सवाल को समझ नहीं पाए, तो जॉन बोले—शायद आप जिंदगी को समझ नहीं पाए! बस, यही है जॉन लेनन का जीवन दर्शन! वे सही मायनों में दूरदर्शी थे और बिरले भी! बीटल्स की कामयाबी के दिनों में उन्होंने बयान दिया था कि जीसस अच्छे थे लेकिन उनके अनुयायी मूर्ख हैं।

हम लोग जीसस से भी ज्यादा लोकप्रिय हैं, अब देखते हैं कौन टिकता है! उनके इस बयान ने उनकी बडबोले की छबि बना दी लेकिन उन्हीं दिनों रबर सोल एलबम में लेनन ने एक गजब का गीत दिया जो पूरे मैनकाइंड पर ही लागू होता है।

समाज की नब्ज पकडना ऐसा ही होता है। फिर जीनियस लोग थोडे बडबोले तो होते ही हैं, उन्हें छबियों से कोई पफर्क नहीं पडता! यह गीत था—नोवेयर मैन! इसमें उन्होंने साफ—साफ शब्दों में आदमी का मनोविज्ञान खोलकर रख दिया।

गौर फरमाइये— ही इज रियल नोवेयर मैन, सिटिंग इन हिज नोवेयर लैंड, मेकिंग आल हिज नोवेयर प्लांस फार नो—बडी। डजन्ट हैव व पाइंट आफ व्यू, नोज नॉट वेयर ही इज गोइंग टू, इजन्ट ही अ बिट लाइक यू एंड मी! रॉक एंड रोल म्यूजिक के इस नुमांइदे ने दर्शन और अध्यात्म पर जो भी गीत दिए हैं, मील के पत्थर हैं! लेट इट बी का एक्रास द यूनिवर्स कभी गौर से सुनिये।

यूं लगेगा मानो लेनन की अध्यात्मिक छलांग में श्रोता भी सहभागी बन रहा है! इस गीत का प्रसंग लेनन ने अत्यंत गहराई के साथ जीया और जब इसे शब्दों व धुनों में गढा तो एक और क्लासिक पीस तैयार हो गया!

इसमें जब वे कहते हैं कि नथिंग गोना चेंज माय वल्र्ड तो उस पर सवाल खडे करना बौनापन लगता है! इसी गीत में वे बार—बार जयगुरू देव—ओम, जैसा हिंदी मंत्र शब्द उच्चारित करते हैं जिसे आज तक पाश्चात्य श्रोता समझ नहीं पाए हैं कि यह क्या शब्द बोला है! एक गायक के तौर पर तो जॉन कमाल के थे!

आवाज बदलने की अदभुत क्षमता उन्हें भी बख्शी थे उपर वाले ने! 1961 में आए पहले बीटल्स एलबम— प्लीज प्लीज मी से लेकर 1970 में लेट इट बी तक लेनन की आवाजों में बदलाव की एक श्रंखला सी है! वक्त के साथ गीतों का बदलता मिजाज भी! पहले पहल जो लेनन राक एंड रोल म्यूजिक और रोमांस के गीत गाता था।

वो समय के साथ—साथ रहस्यलोक की बातें भी करने लगा था! सार्जेंट पेपर्स...के किंग सांग लूसी इन द स्काय पर गौर कीजियेगा! इसकी अजीब गीतकारी पर श्रोताओं ने कहा था कि लेनन नशे की हालत से निकल नहीं पा रहे हैं और नशे में ही रहना चाहते हैं! एक गूढ अर्थ वाले गीतकार लेनन को तो आज तक समझा नहीं गया है!

उनके गीतों के अर्थ अत्यंत कन्पफयूजन वाले होते थे और ऐसा वे शायद जानबूझकर करते थे! मैजिकल मिस्टी टूर के गीतों को सुनने के बाद लेनन के प्रति सहज ही सम्मान भाव पैदा हो जाता है! एफर्टलैस! कुछ करना नहीं है! केवल सुनना है! 1970 में बीटलस भंग होने के बाद एल्टन जॉन के साथ आया उनका सिंगल—इमेजिन उनके टेडमार्क और प्रतिनिधि गीतों में शामिल है! इस गीत में लेनन का फलसफा साफ झलकता है!

पूरे गीत में वे एक सुखद सपना दिखाते हैं कि अगर दुनिया स्वर्ग, नरक, देश, विदेश, सीमाओं, लालच, भूख, नफरत, राजनीति, बुराइयों से मुक्त हो जाए तो कैसा हो! पिफर खुद ही कहते हैं कि आप मुझे स्वप्नद्रष्टा कह सकते हैं लेकिन मैं अकेला नहीं हूं! एकदम क्लासिक है यह गीत!

तो, इसके दस साल बाद 8 दिसंबर का दिन भी आता है जब न्यूयार्क में मार्क डेविड चैपमैन नामक एक अजनबी लेनन को शूट करके खामोश कर देता है! 2000 तक यानी 20 साल बाद तक दुनिया में यह रहस्य कायम रहा कि मार्क ने लेनन कत्ल क्यों किया!

कैद से बाहर आकर चैपमेन ने कहा—मैं मशहूर होना चाहता था! मुझे लगा कि लेनन को मारकर मैं प्रसिदिध पा लूंगा! मैं कुछ बनना चाहता था, लेकिन मैं हत्यारा बन गया और हत्यारे कुछ नहीं होते हैं! वैसे, मार्क ने बकायदा एक सूची बनाई थी जिसमें एलिजाबेथ टेलर, रोनाल्ड रीगन जैसे दिग्गजों के नाम शामिल थे, लेकिन शुरूआत की तो जॉन लेनन से! आखिर जॉन को मारने के लिए खोजना आसान था और हुआ भी वही!

बहरहाल, जॉन लेनन जैसे लोग दुनियादारी की बहुत ज्यादा चिंता करते भी नहीं हैं! तभी तो वे कहते हैं—नोवेयर मैन डोंट वरी, टेक योर टाइम नो हरी, नोवेयर मैन द वल्र्ड इज एट योर कमेंड!!! वाकई, हम में से सबमें नोवेयर मैन छिपा है, जो नोवेयर लैंड में है! जिसे पता नहीं कि सारी योजनाएं क्यों बना रहा है, किसके लिए बना रहा है।

Posted By: Navodit Saktawat