Angrezi Medium Movie Review : 'हिन्दी मीडियम' की सीक्वल के रूप में 'अंग्रेजी मीडियम' बनाई गई जो अब रिलीज हो गई है। कई कलाकार बदले हैं और फिल्म की कहानी भी बदल गई है। यहां भी एडमिशन मुद्दा है जो पहली फिल्म में था। इस बार इरफान को बेटी की एडमिशन लंदन में करवाना है। देश की सीमा पार करते ही यह कहानी नकली हो जाती है। और यही इस फिल्म की कमजोरी है।

इस फिल्म को इरफान की वजह से देखा जाना चाहिए। किसी और कारण से इसे देखने जाएंगे तो निराश होंगे। कहानी का नकलीपन थोड़ी देर में ही बोर करने लगता है। इरफान की एक्टिंग ही है जो सीट पर बैठाए रखने में कामयाब होती है। दीपक डोब्रियाल को भी याद रखा जाना चाहिए। वो भी इस फिल्म का वजन अपने ऊपर बराबर लेते हैं। दीपक ही हैं जिनके कारण आप यहां हंस पाते हैं।

इरफान का काम केवल इमोशनल करना था। वो जब भी परदे पर आते हैं तो भावुक कर जाते हैं। राधिका मदान ने भी उनका साथ दिया है, लेकिन असर केवल आखिरी के एक सीन में दिखता है जब दोनों कार में साथ सफर कर रहे होते हैं। राधिका जब अपना मन बदलती हैं और कहती हैं कि वो लंदन में नहीं पढ़ेंगी तो वो भी इमोशनल कर देती हैं।

वैसे इस फिल्म में इरफान कम देर के लिए दिखते हैं। यहां काफी भीड़ है जो फिल्म में उन्हें छुपा लेती है। डिंपल कपाड़िया और करीना भी मां-बेटी के रूप में हैं और अच्छी खासी जगह घेरती हैं। करीना एक दुखी पुलिस ऑफिसर हैं, उन्हें आप इस फिल्म में हंसता हुआ नहीं देखेंगे। डिंपल फिर भी हंस देती हैं लेकिन करीना तो एंग्री वूमन बनी हुई हैं।

गाने कम करना थे। ये फिल्म की लंबाई को बढ़ाते हैं और बोर भी करते हैं। दो गाने ही ऐसे हैं जो देखे-सुने जा सकते हैं। ये फिल्म राजस्थान में ही रहती तो बढ़िया रहता। राजस्थान छोड़ते ही यह पटरी से उतरती है। इस औसत फिल्म को एक बार देखा जा सकता है। बच्चों को यह दिखा सकते हैं क्योंकि उनके सुनने लायक मैसेज ही फिल्म देती है। मां-बाप के लिए भी यह बात करती है लेकिन समझना बच्चों का ज्यादा जरूरी है।

Posted By: Sudeep Mishra

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