Bala Movie Review : जिन्होंने भी 'उजड़ा चमन' देखी थी, उन्हें तो BALA देखना ही चाहिए। उस फिल्म का इससे अच्छा उतारा कुछ हो ही नहीं सकता। ट्रेलर देखकर इसे परिवार सहित देखने से मत बचिए, पूरे परिवार के साथ देखने लायक है BALA। Ayushmann Khurrana की इस फिल्म को अमर कौशिक ने बनाया है। अमर कौशिक वहीं हैं जो Stree बना चुके हैं। उस हॉरर-कॉमेडी में एक जबरदस्त मैसेज था, BALA में भी है। अमर की किस्सागोही इसलिए ही खास है कि वे अपनी फिल्म को कभी भी मनोरंजन से दूर नहीं जाने देते और देखने वालों को एक गहरी बात, बेहद आसान तरीके से समझा देते हैं।

आय़ुष्मान ने उस इंसान की तकलीफ बताई है जिसके सिर से बाल झड़ते जा रहे हैं। इस तकलीफ को उनके चेहरे पर पूरी शिद्दत के साथ महसूस किया जा सकता है। अच्छा काम यह किया कि इस कहानी को बचपन से शुरू किया। बचपन में शाहरुख खान जैसे बालों वाला 'बाला', 25 साल में ही अनुपम खेर बनने की कगार पर पहुंच गया है। दर्द समझा जा सकता है। यह दर्द बाल वाले दर्शक को भी फिल्म से कनेक्ट कर देता है।

इसके बाद अमर कौशिक की कहानी अपना दायरा बढ़ाती है और शारीरिक कमियों की बात को अपने में समाती चली जाती है। काला-गोरा, ऊंचा-ठिगना, गंजा-मोटा ... अंत में इन सबकी समस्याओं का हल हासिल हो जाता है। इस अंत के लिए ही फिल्म को देखा जाना चाहिए।

हर किरदार पर मेहनत दिखती है। आयुष्मान तो यहां है ही, यामी को बढ़िया रोल मिला। यूपी के माहौल में बड़ी हुई लड़की, जो Tik Tok पर अपनी खूबसूरती की तारीफ पाती है... मुश्किल रोल था पर यामी इसे आसान बना देती हैं। भूमि की किरदार झंडा उठाने वाला है, उन्हें ऐसे दादागिरी वाले रोल करना अच्छे से आते हैं, बस मेकअप परेशान करता रहता है। कभी वे ज्यादा काली हो जाती हैं तो कभी कम।

बढ़िया सीन क्रिएट किए गए हैं और सौरभ शुक्ला के हिस्से में आए सभी एक से एक हैं। सौरभ ने आयुष्मान के पिता का रोल किया है। 'स्त्री' में 'जना' का रोल करने वाले अभिषेक बनर्जी भी यहां खूब मजेदार रोल में हैं। सीमा पाहवा को यहां मूंछ के साथ पेश किया गया है। ये मूंछ बताती है कि निर्देशक ने अपनी फिल्म को बनती कोशिश असली रखने की कोशिश की है।

अच्छा यह है कि गाने-वाने भी ज्यादा परेशान नहीं करते। दो या तीन ही होंगे। एक के बाद एक मजेदार सीन आते रहते हैं और सवा दो घंटे बड़ी आसानी से बीत जाते हैं। यूपी के माहौल में स्टैंडअप कॉमेडियन थोड़ा खटक सकता है लेकिन इतनी छूट निर्देशक को दी जाना चाहिए।

फिल्म की कहानी ऐसी है जिसे सोचा नहीं जा सकता। इसे तो देखना ही बनता है। पूरे परिवार के साथ यह फिल्म देखी जाना चाहिए। दिमाग के कई जाले ये कहानी झाड़ देगी।

Posted By: Sudeep mishra