Choked Review : कोरोनावायरस के इस दौर में फिल्में तो रिलीज हो रही हैं, बस उनकी जगह बदल गई है। जैसे शुक्रवार को अनुराग कश्यप की 'चोक्ड' Netflix पर रिलीज हुई। लगभग दो घंटे की इस फिल्म में आप दो मिनिट ही अनुराग कश्यप की मौजूदगी महसूस करते हैं। इन दो मिनिट के अलावा यह एक घोर सामान्य फिल्म है, जिसे यूं ही देखा जा सकता है और छोड़ा भी जा सकता है।

सैयामी खेर को इस रूप में देखना थोड़ा चौंकाता है। पूरी कहानी उन्हीं की है। बैंक में नौकरी करती हैं और आर्थिक रूप से भी खुश नहीं हैं और ना ही मानसिक शांति है। ऐसे में किचन का सिंक उन्हें और सताए हुए हैं। इन हालात में किचन का सिंक ही उनके जीवन में थोड़ी खुशी भी लाता है। यह चोक्ड सिंक से पानी के साथ नोट भी उगलने लगता है।

निर्देशक ने हीरोइन के दिन बदलते तो नहीं दिखाए लेकिन फिर भी उसके मिजाज से यह दिखा दिया कि किसी की दिमागी शांति के लिए भी पैसा कितना जरूरी है। वो हीरोइन के हाव-भाव पर तो पूरा ध्यान देते हैं लेकिन कहानी के कुछ सवाल सुलझा नहीं पाते।

हर बात एकदम स्पष्ट नहीं होती है। जैसे कैसे संभव है कि नोटबंदी होने के बाद बैंक में काम करने वाली हीरोइन आखिरी दिन तक अपने पास 500 रुपए के रूप में लाखो रुपए रखे रहे। पूरी बिल्डिंग में बंटे पैसों का हिसाब भी समझ से परे है और 2000 के नए नोटों का सिंक से मिलना, सैयामी का कितना भला कर पाता है... यह भी समझाया नहीं गया है।

आधे-अधूरे मन से बनी लगती है यह फिल्म। कुछ गानें भी हैं जिनकी यहां कोई जरूरत नहीं थी। वो घटनाएं गायब हैं जो फिल्म को मजेदार बनाती हैं। रामांच पूरी तरह से गायब है, जबकि नोटबंदी की घटना से इसमें एक अलग ही स्तर दिखना था। हर किरदार इतना कम है कि आप उससे कनेक्ट नहीं कर पाते हैं। कुलमिलाकर यह फिल्म अनुराग कश्यप की लगती ही नहीं है।

Posted By: Sudeep Mishra

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