Four More Shots Please season 2 Review : जब से वेब-सीरीज का क्रेज बढ़ा है, जो भी नई सीरीज बनाई जाती है, प्लानिंग होती है कि दूर तक जाएगी। 'फोर मोर शॉट्स प्लीज ' तो उस समय की आई थी, जब भारत में वेब-सीरीज अपने पैर पसार रही थी और ऐसी कहानी लोगो के सामने परोसी गई जिसको खींचने का पूरा भार महिला किरदारों पर था। पहला सीजन तो दरअसल एक कोशिश ही कह सकते है, जिसमें 10 एपिसोड तो यह समझने में खर्च हो गए कि आखिर मुद्दा क्या है !!!

वैसे इस सीरीज को बनाने वाला ज्यादातर क्रू लड़कियां ही है, पर इसे वुमन ओरिएंटेड या फेमिनिज्म जैसे मुद्दों से जोड़ कर देखेंगे तो मज़ा कम आएगा। पिछली बार की उम्मीद शायद यही रही होगी जिस वजह से इसे वैसी पॉपुलैरिटी नहीं मिल पाई। बेशक लड़कियां इसे पूरे मज़े ले कर देखती थीं।

पिछले सीजन में 2 एपिसोड के बाद गाड़ी पटरी पर आई थी, पर इस बार शुरूआती एपिसोड पर मेहनत ज्यादा की गई है जो आगे की कहानी जानने के लिए मूड बनाए रखती है। बीच तक सब अच्छा चलता है, इस बार समझदारी ज्यादा और अय्याशी कम है।

सबकी प्रोफेशनल, लव और सेक्स लाइफ पहले तीतर-बितर थी, पर अब सब mature हो गई हैं ,अपनी ताकत और कमजोरी को जानती हैं और बहुत हद तक सब असली लगता है। पहला सीजन जहां ख़तम हुआ था उसके 4 महीने बाद नए सीजन की कहानी शुरू होती है। इन दरमियान सब एक दूसरे से दूर हैं, गुस्सा हैं और न ही कोई बातचीत है। एक बार फिर सब मिलते है, फिर सब के साथ गड़बड़ - घोटाले होते है और फिर कुछ न कुछ बनता - बिगड़ता रहता है।

सारे किरदार पहले से बेहतर लगे, जाहिर है अब तक तो सब अपना रोल अच्छे से समझ ही गए होंगे। जिस कॉन्फिडेंस और सब्र के साथ सभी किरदारों को परस्थितियों को हैंडल करते दिखाया है, कई लोग इससे काफी कुछ सीख सकते हैं। चारों की आपसी केमिस्ट्री भी बढ़िया रही है। पिछली बार की तरह कीर्ति कुल्हारी (अंजना) अदाकारी में सब पर भारी है। उनके लिए costume सिलेक्शन भी सबसे बेहतर है। सयानी गुप्ता (दामिनी) से थोड़ी ज्यादा उम्मीद की जा सकती है। इतने समय में कई तरह के रोल कर चुकी हैं, यहां एक सीरियस राइटर के रोल में तो सही हैं, पर जब ज़िन्दगी के दूसरे हिस्सों में उलझ रही होती हैं तब अदाकारी में कुछ कमी-सी लगती है।

बानी (उमंग) रोमांस और सीरियस एक्सप्रेशंस के मामले में कमजोर हैं। हाई एनर्जी वाले सीन्स बिना बोले भी अच्छे से कर जाती हैं पर जब पंजाबी बोलती तब एक अलग ही वाइब में होती हैं। मानवी गंगरू (सिद्धि) ऑनलाइन प्लेटफार्म को अच्छे से समझ रही हैं और टाइमिंग में बहुत सुधार किया है। स्टैंड-अप कॉमेडी में उनके पार्टनर प्रबल पंजाबी (अमित) के साथ ट्यूनिंग बढ़िया है।

इस्तांबुल की गलियों से शुरू होती ये रोलर कोस्टर राइड उदयपुर पैलेस तक आती है। कैमरा, प्रोडक्शन और एडिटिंग का तालमेल अच्छा दिखाई देता है। माइक मैकलीयरी का बैकग्राउंड स्कोर हर बार की तरह ध्यान खींचता है।

कहानी उस मोड़ पर आकर ख़त्म हुई जहां लम्बी चढाई के साथ ढलान भी है। इसको पार पाने के लिए लेखकों के पास बहुत समय है और इसे अब ऐसे आगे बढ़ाना होगा कि दूर तक जाने की उम्मीद बनी रहे।

Posted By: Sudeep Mishra

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