Ghost Movie Review: डर एक ऐसा मसाला है जिसका तड़का मार कर फिल्म इंडस्ट्री हमेशा से ही सफलतम फिल्मों का मजा लेते आई है,भले ही हॉलीवुड के स्पीलबर्ग, मनोज नाइट श्यामलन हो या बॉलीवुड के रामसे या निर्देशक रामगोपाल वर्मा हो।डर सबसे आसान फॉर्मूला माना गया है इसी विरासत को निर्देशक विक्रम भट्ट भलीभाँति संभाला हुआ है। एक बात तो तय है हॉरर फिल्में सफलता की गारंटी जरूर होती हैं मगर हॉरर फिल्में बनाना हर किसी के बस का भी नहीं इसीलिए जब भी हॉरर फिल्मों की बात होती है निर्देशक विक्रम भट्ट का नाम आना लाजिमी हो जाता है। ढेर सारी हॉरर फिल्में करने के बाद एक बार फिर विक्रम भट्ट लेकर आए हैं घोस्ट, जैसा कि नाम से ही जाहिर है यह एक भूत की कहानी है और हैरानी की बात यह है है कि कहां जा रहा है की यह फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है इस तरह का केस इंग्लैंड की अदालत में चला था।

यह कहानी है करण खन्ना (शुभम भार्गव) की उन पर पर अपनी पत्नी के खून का इल्जाम है और जब सरकारी डिफेंस लॉयर सिमरन सिंह (सनाया ईरानी) उनसे मिलने जाती है करण उनसे कहते हैं खून उन्होंने नहीं किया यह कौन उनसे भूत ने करवाया है उनकी बात पर बिल्कुल भरोसा नहीं करती मगर जैसी जैसी घटना आगे बढ़ती है सिमरन को भी यकीन हो जाता है कुछ ऐसा है समझ से परे है और सिमरन उनका केस लड़ने के लिए तैयार हो जाती है आगे क्या होता है इसी ताने-बाने पर बुनी गई है फिल्म घोस्ट।

विक्रम भट्ट आपको सीट पर सिमटने पर मजबूर कर देते हैं। जैसा कि यह फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है इसमें किसी तरह के भद्दे चेहरे वाले भूत नहीं है मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालकर दृश्यों को सफल बनाया गया है।

सनाया ईरानी टेलीविजन की बहुत बड़ी स्टार है मगर उनकी यह पहली फिल्म है और जिस तरह का परफॉर्मेंस उन्होंने दिया है यूं लगता है बॉलीवुड को एक नई हीरोइन मिल गई है। शिवम भार्गव की भी यह पहली फिल्म है इसके पहले शिवम कास्टिंग डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे मगर उनमें काफी संभावनाएं नजर आती है। निर्देशक विक्रम भट्ट भी एक छोटे से किरदार में नजर आते हैं। उन्हें स्क्रीन का मोह छोड़ देना चाहिए।

कुल मिलाकर घोस्ट एक ऐसी फिल्म है जो आपको डराती है। आपको बांधे रखती है। अगर आप हॉरर फिल्मों के प्रेमी हैं तो निश्चित ही घोस्ट आपको पसंद आएगी।

- पराग छापेकर

Posted By: Sonal Sharma