Good Newwz Review : बॉलीवुड का 'कॉमेडी ऑफ एरर्स' पर फिल्म बनाने का मोह कम ही नहीं हो रहा है। यहां माना जाता है कि यह मसाला हर समय हिट है। शेक्सपियर के फार्मूला पर बॉलीवुड की ताजा पेशकश है Good Newwz। इसमें जरूरत होती है तो एक सही पटकथा की जिसमें तमाम तरह के दूसरे तड़के लगाए जा सकें। 'गुड न्यूज़' में भी ऐसा ही कुछ है। राज मेहता के निर्देशन में बनी इस फिल्म की कहानी है वरुण बत्रा (Akshay Kumar) और उसकी पत्नी श्रुति बत्रा (Kareena Kapoor) की, दोनों ही अपने-अपने कामकाजी जीवनमें सफल हैं और आलीशान जिंदगी जी रहे हैं।

दोनों कुछ हालातों में तय करते हैं अब उन्हें एक बच्चे की जिम्मेदारी ले लेना चाहिए, मगर तमाम कोशिशों के बावजूद करीना प्रेगनेंट नहीं होती। दोनों ही अपने दोस्तों की सलाह पर आईवीएफ टेक्नोलॉजी की मदद लेने का फैसला करते हैं। इस टेक्नोलॉजी में स्त्री और पुरुष के अंडाणु लेबोरेट्री में मिलाए जाते हैं और एक एंब्रियो बनाया जाता है जिसे गर्भाशय में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

ठीक इसी तरह की समस्या से दूसरा परिवार भी जूझ रहा है। यह परिवार चंडीगढ़ में है। इसमें हनी बत्रा( दलजीत दोसांझ) और उसकी पत्नी मोनिका(Kiara Advani) हैं। दोनों परिवारों का डॉक्टर एक ही है। दोनों परिवारों का सरनेम बत्रा होने के कारण सिमेंस की अदला-बदली हो जाती है साथ ही दोनों महिलाएं गर्भवती हो जाती हैं। इसके बाद शुरू होता है इन परिवारों पर आफत का दौर। इस ताने-बाने से ये दोनों जोड़े कैसे निकलते हैं, फिल्म में देखियेगा।

निर्देशक राज मेहता को मजबूत स्क्रिप्ट और चुटीले संवादों का खासा फायदा मिला है। इससे आप लगातार हंसते रहते हैं। स्क्रीनप्ले उन्होंने ही लिखा है वह जानते थे कि इसे परदे पर कैसे लाना है। अक्षय कुमार अपनी कॉमेडी के भरोसे हैं, उनकी टाइमिंग कमाल की है। उनके इमोशन भी देखनेलायक हैं। दिलजीत दोसांज भी अक्षय की टक्कर के हैं। दोनों मिलकर कई सीन बढ़िया बना देते हैं।

दोनों हीरोइनों ने भी फिल्म में खासा टेका लगाया है। करीना कपूर के किरदार ज्यादा शेड्स हैं। उन्होंने अपना रोल अच्छा निभाया है। किआरा आडवाणी भी हर फिल्म से मजबूत हो रही हैं। आदिल हुसैन को छोटा रोल मिला है और टिस्का चोपड़ा भी मजबूत हैं।

फिल्म में गाने देखे और सुने जा सकते हैं। बैकग्राउंड स्कोर फिल्म को अलग ही स्तर पर ले जाता है। इसका उपपयोग समझदारी से किया गया है। सिनेमेटोग्राफी अच्छी है और एडिटिंग तीखी है। फिल्म देखी जा सकती है, बस बच्चे साथ ना हों।

- पराग छापेकर

Posted By: Sudeep mishra