आतंकवाद दशकों से दुनिया पर हावी है l देश भी कई आतंकी हमलों से दहला है।खासकर 2007 से 2013 के बीच भारत के अलग अलग इलाकों में हुए बम धमाकों से। लेकिन समय समय पर जवाबी कार्रवाई भी की गई है। कभी आतंकियों का सफाया कर कभी उन्हें बिना एक भी गोली चलाये ज़िंदा पकड़ कर। कुछ ऐसा ही दिखाया गया है अर्जुन कपूर की रिलीज़ हुई फिल्म इंडियाज़ मोस्ट वांटेड में।

राजकुमार गुप्ता, बॉलीवुड में रियलिस्टिक फिल्में बनाने वालों में बड़ा नाम हैं। नो वन किल जेसिका और रेड के जरिये उन्होंने अपने को साबित भी किया है और ये फिल्म उनके निर्देशन की अगली कड़ी है। कहानी इंडिया के एक मोस्ट वांटेड आतंकी को पकड़ने की है, जिसने देश भर में छह साल में बम धमाके कर सैकड़ों लोगों की जान ली है। लेकिन वो सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से बाहर है।

इंडिया का ओसामा कहे जाने वाले युसूफ (सुदेव नायर) को पकड़ने के लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो के थर्ड जनरेशन के ऑफिसर प्रभात कुमार (अर्जुन कपूर) अपने चार साथियों को लेकर नेपाल जाते हैं। उन्हें अपने एक ख़ुफ़िया सूत्र (जितेंद्र शास्त्री) से युसूफ के नेपाल में होने की जानकारी मिलती है। सारे लोग मिल कर उसे पकड़ने के लिए ट्रैप लगाते हैं, ये जानते हुए भी कि उनके सरकार में बैठे बड़े अधिकारियों ने उन्हें ऐसा करने से मना किया है। इस मिशन में क्या अर्जुन कपूर कामयाब होते हैं, और होते हैं तो बिना एक भी गोली चलाये कैसे? ये आपको फिल्म में दिखेगा। वैसे बताया गया है कि ये फिल्म रवीन्द्र कौशिक नाम के एक जासूस के सच्ची कहानी है।

फिल्म में अर्जुन कपूर ने अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किया है और उनका अभिनय अच्छा बन पड़ा है। उनकी टीम के प्रशांत अलेक्जेंडर ( पिल्लई), गौरव मिश्रा (अमित ) और आसिफ़ खान (बिट्टू ) भी ठीक रहे l सीनियर ऑफिसर की भूमिका में राजेश शर्मा (राजेश सिंह) का काम अच्छा रहा। लेकिन फिल्म की सारी कमी इस फिल्म के ट्रीटमेंट को लेकर है। राजकुमार गुप्ता ने इससे पहले अपनी निर्देशन की पकड़ दिखाई है लेकिन इस बार वो ऐसा करने में असफल नज़र आते हैं। फिल्म अधपकी सी लगती है। इतने सीरियस ऑपरेशन को इतने हल्के में दिखाया गया है कि लगता ही नहीं कि वो इंडिया के मोस्ट वांटेड को पकड़ने जा रहे हैं या किसी पॉकेटमार को।

फिल्म में वो पेस भी नहीं है और कई जगह एडिटिंग में भी दिक्कत है। अमित त्रिवेदी के गाने भी ऐसे नहीं हैं जो याद रखे जाएं l इससे पहले आमिर और नो वन किल्ड जेसिका जैसी फिल्म का निर्देशन कर चुके राजकुमार गुप्ता के निर्देशन में बहुत सी खामियां नज़र आती हैं और इस कारण कई जगह अर्जुन कपूर भी हास्यास्पद से नज़र आते हैं l वैसे देश के दुश्मनों को पकड़ने और उसके लिए दिखाई गई जांबाज़ी वाली कहानियों में आपको दिलचस्पी हो तो इस फिल्म को आप देखने जा सकते हैं l इस फिल्म को पांच में से ढ़ाई स्टार मिलते हैं l

- मनोज खाडिलकर