मनोविज्ञान पर आधारित कई सारी फिल्में बॉलीवुड में बन चुकी हैं। मनोविज्ञान के अलग-अलग पहलुओं पर बॉलीवुड और दूसरी फिल्म इंडस्ट्रीज ने काफी रोशनी डाली है। 'जजमेंटल है क्या' इसी कड़ी का विस्तार है। यह कहानी है बॉबी बाटलीवाला ग्रेवाल की (कंगना रनौत) जो एक्यूट साइकोसिस मानसिक बीमारी से ग्रसित है जिसमें सच और झूठ क्या है इसमें कोई अंतर ही नहीं समझ में आता है।

बॉबी, डबिंग आर्टिस्ट है और अलग-अलग किरदारों की डबिंग करते हुए वह कैरेक्टर उसके अंदर समा जाते हैं।कभी वह पुलिस इंस्पेक्टर बन जाती है तो कभी चुड़ैल। उसके सामने जो घट रहा है सच लगने लगता है। ऐसे में बॉबी के यहां एक दंपत्ति किराएदार आते हैं और इनमें से केशव, बॉबी को पसंद आने लगता है। लेकिन कुछ दिनों में केशव की पत्नी की रहस्यमय मृत्यु हो जाती है। बॉबी को पूरा शक है कि केशव ने ही अपनी पत्नी का खून किया है और वह यह पुलिस को बताती भी है। वहीं केशव को लगता है कि उसकी पत्नी का खून बॉबी ने किया है। पुलिस इसे एक्सीडेंट केस समझकर बंद कर देती है। मगर बॉबी के दिमाग में शक घर करके बैठ जाता है कि उसकी पत्नी का खून केशव ने ही किया है। उसके बाद क्या-क्या होता है इसी ताने-बाने पर बुनी गई है जजमेंटल है क्या।

इस फिल्म का सबसे बड़ा प्लस प्वाइंट है इसका निर्देशन और कहानी। फिल्म के निर्देशक प्रकाश को इसी फिल्म के तेलुगु वर्जन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया था और उन्होंने ही इसे हिंदी में बनाया है। फिल्म बॉलीवुड की वीडियो मसाला मनोरंजक फिल्मों में से नहीं है मगर जिस तरह से स्क्रीनप्ले रचा गया है जिस तरह से किरदारों को बनाया गया है यह फिल्म आप को बांधे रखने में कामयाब होती है।

पहले भाग में फिल्म कहीं भी आगे नहीं बढ़ती मगर इंटरवल के बाद कई सारे ट्विस्ट्स एंड टर्न्स आपको फिल्म से बांधे रखने पर मजबूर कर देते। फिल्म में किरदार बहुत ही कम है तो जाहिर तौर पर फिल्म का सारा दारोमदार राजकुमार राव और कंगना के ही कंधे पर था। इन दोनों ने यह जिम्मेदारी बड़ी सफलता से निभाई है। इस किरदार के लिए कंगना रनौत से बेहतर अभिनेता कोई हो ही नहीं सकता था। जिस तरह मानसिक बीमार व्यक्ति का किरदार उन्होंने निभाया है वह काबिले तारीफ है। राजकुमार राव फिल्म दर फिल्म साबित करते जाते हैं उनकी सफलता का राज सिर्फ और सिर्फ उनका सशक्त अभिनय है।

कुल मिलाकर जजमेंटल है क्या कोई बॉलीवुड की मनोरंजक कमर्शियल फिल्म तो नहीं लेकिन बिल्कुल ही अलग जॉनर की, अलग किरदारों की, अलग ट्रीटमेंट की एक ऐसी कहानी है जिनकी दुनिया में शायद आप झांकना पसंद करें। लीक से हटकर फिल्म क्या होती है यह जानने के लिए आप इसे देख सकते हैं।

- पराग छापेकर

Posted By: Sudeep mishra