जब फिल्म सफल होती है तो उसका सीक्वल बनता है। सब्जेक्ट नहीं बदला जाता। कुछ ही फिल्में होती हैं जो अपने पहले भाग से बेहतर बन पाती हैं। निर्देशक रेमो डिसूजा ने भी कुछ साल पहले 'एबीसीडी' बनाई थी, फिर इसकी दूसरा भाग बनाया, अब यह सफर Street Dancer 3D तक आ पहुंचा है। अच्छी बात यह है कि रेमो हर कड़ी के साथ बेहतर हुए हैं।

इस कहानी में दो पात्र हैं सहज (Varun Dhawan) और इंदर (पुनीत)। ये दोनों ही लंदन में अपना डांस ग्रुप चलाते हैं। इस ग्रुप का नाम 'स्ट्रीट डांसर' है। इनायत (Shraddha Kapoor) पाकिस्तानी मूल की है और इनका भी एक ग्रुप है। दोनों ग्रुप का टकराव लंदन की सड़कों या इंडिया-पाकिस्तान क्रिकेट मैच में होता रहता है। सहज एक शादी के लिए भारत के पंजाब प्रांत आता है। पैसों के लिए पंजाब से चार लोगों को अवैध रूप से लंदन ले जाता है। सहज का सपना है उसके भाई के ग्रुप स्ट्रीट डांसर को नंबर वन बनाना, ह्यूमन ट्रैफिकिंग से मिले पैसे वो इसी ग्रुप को संवारने में लगाता है। लगभग तभी एक इंटरनेशनल कंपटीशन घोषित होता है। दोनों ही ग्रुप इसमें हिस्सा लेते हैं। इसके बाद जो भी स्ट्रीट डांसर की कहानी में है वो जाकर ही देखना चाहिए।

फिल्म में आलीशान सेट्स हैं। अनदेखी लोकेशन और अद्भुत डांस हैं। यह सब बातें मंत्रमुग्ध कर देती हैं। इस तरह की फिल्मों की कहानी स्पर्धा जीतना ही मकसद होता है मगर फिर भी लोग इसे देखते हैं तो वाकई बड़ी बात है। इस काम को रेमो अच्छे से करते हैं। इस मूवी में एक्टिंग पर तो ध्यान ही नहीं जा, सबसे महत्वपूर्ण था डांस। श्रद्धा कपूर और वरुण धवन पहले भी ऐसा काम कर चुके हैं इसलिए उनके लिए ये बड़ी बात नहीं थी। अच्छा यह हुआ कि नोरा फतेही की एंट्री हुई और वो वाकई अद्भुत डांसर हैं। प्रभु देवा को भी नाचते देखना अच्छा लगता है।

ऐसी फिल्मों में गानों का रोल खास होता है और इसके सभी गाने कमाल के हैं। दो दशक पुराना गाना 'मुकाबला' यहां नए अंदाज में देखने को मिलेगा। इसे देखना कुल मिलाकर मजेदार है। विश्वस्तरीय डांस से इस फिल्म में चार चांद लगे हैं। इंसानियत का झंडा भी यह फिल्म उठाती है। ज्यादा उम्मीदों के साथ इस देखने मत जाइए, 'स्ट्रीट डांसर 3 डी' अच्छी तो है लेकिन आपकी उम्मीद से यह हार सकती है।

- पराग छापेकर

Posted By: Sudeep mishra

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