
एंटरटेनमेंट डेस्क। बॉलीवुड के ही-मैन धर्मेंद्र की जिंदगी जितनी फिल्मों में चमकी, निजी जीवन में वह उतने ही मजबूत स्तंभ बनकर परिवार के साथ खड़े रहे। दो शादियों के बावजूद उन्होंने अपने पहले परिवार से रिश्ता कभी नहीं तोड़ा। जहां उनकी दूसरी पत्नी हेमा मालिनी हमेशा सुर्खियों में रहीं, वहीं प्रकाश कौर हमेशा पर्दे से दूर रहीं. लेकिन 71 वर्षों तक धर्मेंद्र के साथ उनका संबंध बिल्कुल अडिग रहा।
लाइमलाइट से दूर लेकिन दिल में गहरा प्रेम
कुछ समय पहले जब धर्मेंद्र अस्पताल में भर्ती हुए थे, प्रकाश कौर का रोता हुआ वीडियो सामने आया था। उसमें उनका दर्द और प्रेम साफ दिखाई देता था। यह वही संबंध था जो लाइमलाइट से भले दूर रहा, लेकिन अपनी गहराई में बेहद मजबूत था. शांत, सहनशील और पूरी तरह समर्पित।
कम उम्र में शादी, फिर शुरू हुआ संघर्षों का सफर
धर्मेंद्र ने फिल्मों में कदम रखने से पहले, 1954 में 19 साल की उम्र में प्रकाश कौर से शादी कर ली थी। यह अरेंज मैरिज थी। शादी के बाद ही वे सनी देओल के पिता बन चुके थे। फिल्मों में आने के बाद बाकी बच्चों बॉबी देओल, अजीता और विजेता का जन्म हुआ। जहां धर्मेंद्र अपने करियर में आगे बढ़ रहे थे, वहीं प्रकाश कौर बच्चों की परवरिश में लगी रहीं।
परिवार को संभाले रखीं प्रकाश कौर
बॉलीवुड में सफलता ने धर्मेंद्र को एक बड़ा सितारा बनाया, लेकिन प्रकाश कौर हमेशा पीछे रहकर परिवार की नींव मजबूत करती रहीं। धर्मेंद्र कई मौकों पर यह स्वीकार कर चुके हैं कि प्रकाश कौर ने पूरे परिवार को एकजुट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हेमा मालिनी से प्यार और दूसरी शादी, लेकिन रिश्ता कभी नहीं टूटा
'शोले' के दौरान धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की नज़दीकियाँ बढ़ीं और यह रिश्ता शादी तक पहुंचा। धर्मेंद्र ने 1980 में धर्म परिवर्तन कर हेमा मालिनी से शादी कर ली। इसके बावजूद प्रकाश कौर ने कभी शिकायत नहीं की। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि “हेमा जैसी महिला पर कोई भी पुरुष आकर्षित हो सकता है।” यह उनकी परिपक्वता, त्याग और समझदारी का प्रतीक था।
आखिरी दिनों तक धर्मेंद्र के साथ रहीं प्रकाश कौर
धर्मेंद्र ने प्रकाश कौर से रिश्ता कभी खत्म नहीं किया। दोनों एक साथ रहते रहे और जीवन के अंतिम वर्षों में प्रकाश कौर साए की तरह उनके पास थीं। बॉबी देओल ने भी स्वीकार किया था कि माता–पिता लंबे समय से साथ रह रहे थे। धर्मेंद्र अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन पीछे रह गई यह प्रेमकहानी यह साबित करती है कि प्रेम सिर्फ रोमांस नहीं धैर्य, त्याग और आजीवन साथ निभाने का नाम है।