Happy Teachers Day 2019: आज टीचर्स डे के दिन हर कोई अपने फेवरेट टीचर को याद करता है। टीवी सितारों ने भी इस दिन अपने गुरुओं को याद किया जिन्होंने उन्हें जीवन में लक्ष्यों को खोजने में मदद करने से लेकर, उनकी परेशानियों को दूर करने और आत्मविश्वास पैदा करने में मदद की। इस टीचर्स डे पर यहां जानिए इन टीवी एक्टर्स ने अपने गुरुओं के बारे में क्या कहा।

विकास वर्मा

स्कूल में मेरे पसंदीदा शिक्षक कमल जी सर थे। वह बहुत पॉजिटिव थे और उनकी दी गई शिक्षा आज कम ही देखने को मिलती है। साथ ही, उनका लुक भी गजब का था। उनके पढ़ाने का तरीका इतना अलग था कि हम सभी उनके पीरियड के आने का इंतजार करते थे।

अविनाश मिश्रा

मेरी पसंदीदा टीचर मिस रश्मीत हैं, वे स्कूल में अकाउंट्स पढ़ाती थीं। उन्हें पता था कि मैं हमेशा से अभिनेता बनना चाहता था। मुझे हमेशा उनका समर्थन और प्रेरणा मिली। स्कूल में मेरे एक्टर बनने के इस लक्ष्य को लेकर हंसी भी उड़ाई जाती थी लेकिन उन्हें हमेशा मुझ पर और मेरे सपने पर भरोसा था।

अंगद हसीजा

मैं भाग्यशाली रहा हूं कि चंडीगढ़ में मेरे स्कूल के सभी टीचर्स मुझे पसंग करते थे और मैं सभी टीचर्स को पसंद करता था। मैं क्लास में सबसे सिम्पल और इनोसेंट बच्चा था। मुझे हमेशा आर्ट और ड्राइंग की ओर झुकाव था, इसलिए मेरे टीचर्स मुझे पसंद करते थे।

मुनीशा खटवानी

मेरा कोई पसंदीदा शिक्षक नहीं है। मेरे लिए, मेरे जीवन ही शिक्षक है। कोई विशेष व्यक्ति नहीं है जिसने मुझे सिखाया है। जिंदगी ने मुझे सब कुछ सिखाया है। मुझे लगता है कि जीवन मेरे लिए सबसे बड़ा स्कूल और कॉलेज रहा है। मेरे लिए शिक्षा, सिर्फ कागज का एक टुकड़ा है। अनुभव अधिक महत्वपूर्ण हैं, यह है कि आप कैसे हैं और वास्तविक जीवन में व्यवहार करते हैं।

शशांक व्यास

मेरे जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जो मेरा टीचर हो। मैं गलतियां करता हूं और मैं इससे सीखता हूं। मेरी गट फीलिंग ही मेरी टीचर है और मैं अपने दिल के मुताबिक चलता हूं। मेरे पास अपनी समस्याएं हैं और कोई भी मेरी ओर से उनका सामना करने वाला नहीं है। इसलिए आप गिरते हैं और उठते हैं और जीवन में आगे बढ़ते हैं।

अंश बागरी

श्यामक डावर मेरे पसंदीदा टीचर हैं। उन्होंने मुझे बहुत अच्छा डांस करना सिखाया। उन्होंने मुझे जीवन के बारे में बातें सिखाईं और मेरी प्रॉब्ल्मस को लेकर हमेशा रास्ता दिलाने के लिए मौजूद रहे। एक शिक्षक वह होता है जो आपको जीवन में किसी भी समस्या का सामना करना सिखाता है और जब भी मुझे किसी भी मदद की जरूरत हुई तो उन्होंने मेरी मदद की।

रोहिताश्व गौर

मेरे कॉलेज में मेरे पसंदीदा शिक्षक थे अरोड़ा सर। मैंने नॉनमेडिकल साइंस लिया था लेकिन मैं फेल हो गया और फिर मैंने आर्ट्स ले लिया। अरोड़ा सर ही थे जिन्होंने मेरे करियर को आकार दिया। मेरे पिता ने मुझे साइंस लेने के लिए तैयार किया था और उन्होंने मुझे फिजिक्स पढ़ाया। उन्होंने हमेशा मुझसे कहा कि मुझे आर्ट्स लेना चाहिए न कि साइंस और यह कि मैं एक कलाकार था न कि कोई ऐसा व्यक्ति जो वैज्ञानिक बन जाए। उन्होंने मेरे पिता को समझाया और मुझे ड्रामेटिक्स में शामिल करने के लिए राजी किया और मुझे अभिनय करने दिया। उन्होंने मुझे एनएसडी के बारे में भी बताया और अपने थिएटर करियर के माध्यम से मेरा मार्गदर्शन भी किया। यह एक बड़ी बात नहीं होगी यदि मैं ये कहूं कि आज जो कुछ भी हूं, उनकी वजह से हूं, मैं अभी भी उसके संपर्क में हूं। वह वास्तविक अर्थों में मेरे सच्चे गुरु रहे हैं।

मृणाल देशराज

मेरे पास ऐसा कोई नहीं है जिसे मैं अपने शिक्षक की तरह मानता हूं। जीवन मेरा शिक्षक है और समय के साथ मैंने बहुत कुछ सीखा है। मैं उन सभी अच्छे गुणों को लेता हूं, जिन्हें मैं जानता हूं, कहीं न कहीं मैं हर किसी से सीखता हूं। मैं पढ़ता हूं मैं देखता हूं, मैं बात करता हूं और मैं हर किसी से सीखता हूं। मैं उन लोगों से सीखता हूं जिनसे मैं मिलता हूं। मैं हर किसी की सराहना करता हूं और उनसे सीखता हूं। मेरे पास विशेष रूप से एक आइडल नहीं है, सभी में दोष हैं और मैं लोगों से सकारात्मक बिंदु लेने की कोशिश करता हूं।

अतुल वर्मा

मेरे पिता एक व्यक्ति हैं जो अभी भी मेरे लिए एक शिक्षक की तरह हैं। बचपन में, हमें हमेशा लगता था कि हमारे माता-पिता कई चीजें करने से रोकते हैं। हम हमेशा सोचते हैं कि दूसरों को चीजें करने को मिलती है और हमें उसकी अनुमति नहीं है। लेकिन मेरे पिता मुझे समझाते थे कि चीजों के फायदे और नुकसान समझाते थे, बताते थे कि क्या मेरे लिए अच्छा है या क्या बुरा हैं और आमतौर पर वह चीजें जिसकी मुझे अनुमति नहीं थी वाकई में अंत में बुरी ही नजर आई। इसलिए, मैंने हमेशा उनकी बात सुनी और उनका मार्गदर्शन लिया। आज भी, उनके अपने पूरे जीवन का अनुभव सुनता हूं। उन्होंने हमेशा मेरी सबसे खराब स्थितियों से बाहर आने में मेरी मदद की है। उन्होंने हमेशा मुझे सिखाया है कि आप बहुत अधिक उत्साहित न हों और आपके आनंद और दुखों में हमेशा लो रहें और मानसिक संतुलन बनाए रखें और सकारात्मक रहें क्योंकि आप नहीं जानते कि कल क्या होगा।

अमल सहरावत

मेरे स्कूल के दिनों में मेरे पसंदीदा शिक्षक मेरे स्कूल के हाउसकीपिंग स्टाफ थे। जब भी मुझे थकावट महसूस होती थी या मैं पढ़ाई या गतिविधियों में हिस्सा नहीं चाहता था, तो मैं उन्हें देखकर प्रेरित हो जाता था। वे स्कूल में हमसे पहले आते, हमारे बाद जाते और बिना किसी शिकायत के, हमसे ज्यादा मेहनत करते और उनके चेहरे पर हमेशा एक मुस्कान रहती थी। आज जब मुझे थकावट महसूस होती है तो मैं उनसे अपनी प्रेरणा लेता हूं।

जुबेर के खान


स्कूल में मेरी एक टीचर थीं जिन्होंने शुरू में मुझे बहुत ताना मारा, लेकिन बाद में, वहीं थी जिसने मुझे मॉडलिंग और अभिनय में जाने का सुझाव दिया। उसका नाम श्रीमती भारद्वाज मैम है। वह स्कूल में सबसे बुजुर्ग थी और बहुत सख्त भी थी, लेकिन उनके वो शब्द मैं हमेशा के लिए अपने दिल में रखता हूं।