नई दिल्ली। सन् 1986 दूरदर्शन पर रामायण का प्रसारण हुआ था। तब रावण की भूमिका अरविंद त्रिवेदी ने निभाई थी। रावण के रूप में उनकी अट्ठास से हर घर वाकिफ था। हम यहां बताएंगे कि 31 साल बाद अब अरविंद त्रिवेदी के क्या हाल हैं?

1938 में मध्यप्रदेश के इंदौर में जन्में अरविंद त्रिवेदी पर अब उम्र का असर साफ झलक रहा है, लेकिन वे किसी न किसी रूप में गुजराती सिनेमा से जुड़े रहे हैं। उनके करियर की शुरुआत गुजराती सिनेमा से ही हुई थी।

79 वर्षीय अरविंद त्रिवेदी ने कई गुजराती फिल्मों में काम किया है, लेकिन असली पहचान 'लंकेश' ने ही दिलाई। बताते हैं कि छोटे पर्दे का यह रावण अब राम भक्त बन गया है। उनका मानना है कि इन्सान कर्म यहां करता है, लेकिन जो भवसागर पार कर जाएगा, वह भगवान बन जाएगा।

ऐसी थी रामानंद सागर से पहली मुलाकात

रामानंद सागर से अरविंद त्रिवेदी की पहली मुलाकात भी दिलचस्प रही थी। तब रामानंंद सागर को रावण की तलाश थी। अरविंद त्रिवेदी भी ऑडिशन के लिए पहुंचे थे। बताते हैं कि अरविंद त्रिवेदी के पहला डायलॉग बोलते ही रामानंद सागर ने उन्हें चुन लिया था।

रामायण के सह निर्देशक प्रेम सागर ने भी कहा था, अरविंद को देखते ही रावण की छवि सामने आई और हमें हमारा रावण गुजरात में मिला।

1991 में अरविंद त्रिवेदी को साबरकांठा सीट से राज्यसभा भेजा गया था। 1996 तक वे सदस्य रहे। अब उनका ज्यादातर वक्त घर में ही गुजरता है।

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