स्टार प्लस पर प्रसारित 'महाभारत' में भी कई ऐसे किरदार है जिनके लिए रियलिटी शो काफी मददगार साबित हुआ है। मध्‍यप्रदेश के चंबक के रहने वाले सौरव सिंह गुर्जर भी उन्हीं युवाओं में से एक है जिन्हें एक रेसलिंग शो के कारण महाभारत में 'भीम' बनने का मौका मिला। उनसे बातचीत के अंश -

भीम के लिए किस तरह हुआ आपका सिलेक्शन?

टीवी इंडस्ट्री में महाभारत जैसे मेगा शो से शुरूआत करना मेरे लिए काफी यादगार रहा है। किक बॉक्सिंग में नेशनल अवॉर्ड मिलने के बाद मैंने एक कुश्ती के रिअलिटी शो में जाने का फैसला लिया था। इसके बाद स्टार प्लस से मुझे महाभारत के भीम के लिए ऑफर आया। इस शो के लिए एक साल तक सभी किरदारों ने रजत कपूर की एक्टिंग क्लास में ट्रेनिंग ली।

छोटे से गांव से मुंबई में आने का अनुभव कैसा है?

चंबल के एक छोटे से गांव से मुंबई की ग्लैमरस लाइफस्टाइल अपनाना थोड़ा मुश्किल था। कई बार ऐसा लगा कि अब इस शूटिंग को छोड़कर चला जाऊं। एक बार सोचा कि बड़े-बड़े पहलवानों से नहीं हारा तो शूटिंग से क्या डरना? इसके बाद मैंने फैसला किया इस शो से अपनी पहचान बनाकर ही जाऊंगा।

गांव के लोगों की आपसे कितनी उम्मीदें है?

जब नए साल के समय गांव गया तो वहां 5 हजार से ज्यादा लोग मेरे स्वागत के लिए खड़े तो वह एक लम्हा मेरे लिए यादगार रहा है। आज भी गांव में जब भी मेरा और दुर्योधन का कोई सीन होता है तो गांव में टीवी लगाया जाता है। सीन में फाइटिंग पर गांव में फायरिंग होती है। आज गांव के लोगों की मुझसे उम्मीद है कि मैं टीवी शो में काम करूं और गांव का नाम रोशन करो।

भीम और सौरव में क्या समानता है?

भीम और मुझमें सबसे बड़ी समानता है कि दोनों को ही गुस्सा ज्यादा आता है। इसी के साथ अब गुस्से पर नियंत्रण रखना भी जरूरी हो गया है क्योंकि किक बॉक्सिंग गुस्से के बिना जीती नहीं जा सकती थी। अब नए शो में आकर उसके लिए खुद को तैयार करना काफी मुश्किल काम है।अब घुड़सवारी से लेकर हथियार चलाने तक की ट्रेनिंग ले रहा है।

प्रदेश में स्पोर्ट्समैन के लिए कितनी सुविधाएं हैं?

मप्र में स्पोर्ट्समैन के लिए जरूरी सुविधाएं और पैसा भी नहीं है। यदि एक स्पोटर्स मैन को सरकारी नौकरी भी मिल जाती है तो भी उसका गुजारा नहीं होता है।मैंने इस शो में आने के बाद अपने गांव में युवाओं के लिए एक जिम शुरू की है।