मेहनत सभी की रंग लाती है, और समय सबका आता है बस जीवन में धैर्य रखना जरूरी है। आज जिन लोगों को हम नामी और शोहरत वाला कहते हैं असल में इस नाम और शोहरत के पीछे उसकी मेहनत छुपी होती है जो दूसरे व्यक्ति को दिखाई नहीं देती। आज हम आपसे एक ऐसे ही व्यक्ति के बारे में चर्चा करने जा रहे हैं जो एक समय पहले मात्र 4 हजार की नौकरी से अपना व अपने परिवार वालों का पेट पालता था। लेकिन आज उसे हर घर का सदस्य बखूबी जानता हैं। चलिए इस मेहनतकश, गरीबी से उठकर लोगों के दिलों में अपनी छाप छोड़ने वाले सब टीवी पर आने वाले तारक मेहता का उल्टा चश्मा में बाघा का किरदार निभाने वाले तन्मय वेकारिया के बारे में जानते हैं।

जी हां सब टीवी पर आने वाले फेमस शो तारक मेहता का उल्टा चश्मा के बारे में आज देश का बच्चा बच्चा जानता है। ये शो आज के समय में इतना ज्यादा पॉपुलर है कि इसका नाम ही काफी है। इस शो में आने वाला हर किरदार अपने आप में महत्वपूर्ण भूमिका रखता है। इस शो की शुरुआत 2008 में हुई थी और 13 साल से भी ज्यादा समय से यह शो दर्शकों के बीच में काफी लोकप्रिय बना हुआ है।

15 साल से गुजराती थियेटर में किया है काम

तारक मेहता के उल्टा चश्मा शो में जेठालाल चंपकलाल गढ़ा की दुकान पर काम करने वाला बाघा आज दर्शकों के बीच में पसंदीदा किरदार बना हुआ है। बाघा का किरदार निभाने वाले एक्टर का असली नाम तन्मय वेकारिया है जिसे शो में बाघा के नाम से जाना जाता है। तन्मय गुजरात के निवासी हैं, बतादें कि उनके पिता अरविन्द वेकारिया भी अभिनेता रहे हैं और कई गुजराती ड्रामा में उन्होनें काम किया है। तन्मय ने भी लगभग 15 साल तक गुजराती थियेटर में काम किया है।

बड़ी मुश्किल से मिला बाघा का किरदार

तारक मेहता का उल्टा चश्मा शो शुरू से ही दर्शकों की पसंद रहा है। ऐसे में एक पॉप्युलर शो में किसी किरदार को पाना काफी मुश्किल होता है और यही मुश्किल तन्मय के साथ भी थी। आज तन्मय शो में जिस बाघा का रोल कर रहे हैं यह रोल उन्हे इतनी आसानी से नहीं मिला बल्कि इसके पीछे उन्होंने लाख जतन किए हैं। इससे पहले वो शो में चार और किरदार प्ले कर चुके हैं। जिसमें ऑटो ड्राइवर, टैक्सी ड्राइवर, इंस्पेक्टर और टीचर का रोल शामिल था। इसके बाद 2010 में तन्मय को बाघा का रोल दिया गया। तब से ही तन्मय ने बाघा के किरदार में अपनी जान डाल दी और वे दर्शकों की पसन्द बन गए।

बैंक में मामूली से कर्मचारी थे तन्मय

तन्मय की अगर पास्ट लाइफ के बारे में बात करें तो पहले यह एक बैंक के कर्मचारी हुआ करते थे, जहां ये मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव के पद पर कार्य करते थे। यहां पर उन्हें मात्र 4 हजार रुपये की तनख्वाह मिलती थी। लेकिन तन्मय के पिता एक एक्टर थे इसलिए तन्मय भी एक्टर बनने का शौक रखते थे। यही कारण था कि तन्मय ने धीरे से अपने आप को एक्टिंग के क्षेत्र में उतारा और गुजरात के थिएटर में अपने पिता के साथ एक्टिंग करने लग गए। इसी एक्टिंग में उनकी मेहनत रंग लाई और आज वह जाना पहचाना नाम हैं।

Posted By: Arvind Dubey

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