वडोदरा। 'मुझे मेरे प्रेमी के खिलाफ कोई शिकायत नहीं करनी है। यह मेरे प्रेम की निशानी है। मैं उस निशानी को अपने साथ रखना चाहती हूं।' ये शब्द हैं वडोदरा में रहने वाली एक 20 वर्षीय लड़की की, जिसे 6 माह का गर्भ है। एक्लेमिसया नामक बीमारी से ग्रस्त युवती कुंवारी मां बनने की जिद कर रही है।

हाल ही में पीड़िता को सयाजी हॉस्पिटल के गायनेक विभाग में इलाज के लिए लाया गया था। जहां जांच में पता चला कि उसे 6 माह का गर्भ है। डॉक्टरों को जब पता चला कि युवती अविवाहित है तो उसके घरवालों को इसकी सूचना देनी चाही। लेकिन, युवती का जवाब सुनकर पुलिस भी कुछ नहीं कर पाई। उसने रिपोर्ट तक भी नहीं लिखवाई।

घटना की जानकारी मिलते ही गोरवा पुलिस के एएसआई फतेसिंह राठवा युवती का बयान लेने के लिए पहुंचे। जहां लड़की ने अपने प्रेमी के खिलाफ शिकायत नहीं लिखवाई। उसने पुलिस को बताया कि प्रेमी से शादी करने के लिए माता-पिता तैयार नहीं थे, इसलिए उसने यह कदम उठाया। वयस्क होने के कारण पुलिस युवती पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं करने के लिए लाचार है।

एक्लेमिसिया नामक बीमारी से पीड़ित है युवती

जब युवती को सयाजी अस्पताल में लाया गया था, तब परीक्षण से यह पता चला कि उसे एक्लेमिसिया नामक बीमारी है। इस बीमारी में प्रेगनेंसी के दौरान ब्लडप्रेशर बढ़ जाता है। फीट आना शुरू हो जाता है। यदि इसका तुरंत इलाज नहीं करवाया गया तो भविष्य में मां और बच्चे दोनों की जान को खतरा है।

'अबॉर्शन के सिवाय दूसरा कोई रास्ता नहीं है'

गायनेक विभाग के डॉ. योगेश परमार ने बताया कि गर्भ में बच्चा भले ही कितने ही महीने का हो। एक्लेमिसिया यानी गर्भधारण के बाद आने वाली फीट की बीमारी में बच्चे को भी फीट आती है। इससे मां और बच्चे दोनों की जान को खतरा है। गर्भपात के सिवाय दूसरा कोई रास्ता नहीं है।

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