अहमदाबाद। गुजरात में एशियाई शेर सुरक्षित होने के राज्य सरकार के दावे गलत साबित हुए है। यहां पिछले दो साल में 222 शेरों की मौत हो गई है। कांग्रेस के विधायक इमरान खेड़ावाला की ओर से पूछे गये प्रश्न के उत्तर में वन व पर्यावरण मंत्री गणपत वासवा ने यह जानकारी दी ।

उन्होंने सदन में बताया कि ज्यादातर शेरों की मौत प्राकृतिक रुप से हुई है। जबकि 23 शेरों की मौत अप्राकृतिक रुप से हुई है। पिछले दो साल में 52 शेर, 74 शेरनी की मौत हुई है। वहीं 90 अधिक शेर के बच्चों की मौत हुई है।

वन विभाग ने स्वीकार किया है कि वर्ष 2018-19 में केनाइन डिस्टेम्बर वायरस से 34 शेरों की मौत हुई थी। वन विभाग के मुताबिक फिलहाल गीर सफारी पार्क में 109 शेर, 201 शेरनी, 140 शेर के बच्चे है। गिर के जंगल में कुल मिलाकर शेरों की संख्या 523 तक पहुंची है।

वन व पर्यावरण मंत्री गणपत वासवा ने बताया कि राज्य सरकार शेरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है। सरकार ने कई अहम कदम उठाये है। जिसमें सासण गीर, अमरेली सहित के जंगलों में से गुजरात सरकार ने रेलवे लाइनों के दोनों ओर फेंसिंग लगाने की कार्रवाई पूर्ण की है। शेरों पर नजर रखने के लिए 75 रेडियो कोलर खरीदे गए है।

जंगल में जगह-जगह सीसीटवी कैमरे लगाये गये है। शेरों को सही समय पर उपचार मिल सके इसलिए एंबुलेंस भी 24 घंटे में तैनात की गई है। गीर में अवैध रुप से होने वाले लायन शो के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए वन मित्रों को नियुक्त किया गया है। वन मित्र की गुप्त सूचना से पिछले दो साल में लायन शो दिखाने वाले कुल 74 लोगो को गिरफ्तार किया गया है।

वन मंत्री ने बताया कि सरकार शेरों की सुरक्षा पर करोड़ो रुपये खर्च करती है। गीर जंगल में ही बीमार शेरों को उपचार मिलें इसके लिए सरकार ने शेरों के लिए करोड़ो रुपये का आधुनिक अस्पताल बनाने का बनाने का निर्णय किया है।