गांधीनगर। गुजरात से राज्यसभा की दोनों सीटों पर भाजपा ने अपना कब्जा बरकरार रखा है। भाजपा प्रत्याशी और विदेश मंत्री एस जयशंकर व जुगलजी ठाकोर निर्वाचित हुए हैं। कांग्रेस के दो विधायकों ने भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की, वहीं राकांपा व बीटीपी ने भी भाजपा का साथ दिया। राज्यसभा की दो सीट के लिए शुक्रवार को हुए उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार एस जयशंकर व जुगलजी ठाकोर की जीत पहले से तय थी, लेकिन कांग्रेस ने हार तय होने पर भी गौरव पंड्या व पूर्व मंत्री चंद्रिका बेन चूडास्मा को मैदान में उतारा था।

भाजपा प्रत्याशियों को 104-104 मत मिले जबकि कांग्रेस उम्मीदवारों को 70-70 मत मिले। कांग्रेस के बागी विधायक अल्पेश ठाकोर व धवलसिंह झाला ने पार्टी व्हीप का उल्लंघन करते हुए भाजपा के पक्ष में मतदान किया। भारतीय ट्राइबल पार्टी के छोटू वसावा सहित दो विधायकों ने भी भाजपा के पक्ष में मतदान किया। गत चुनाव में बीटीपी कांग्रेस के साथ थी लेकिन लोकसभा चुनाव में गठबंधन नहीं होने से उसने पाला बदल लिया। राकांपा विधायक कांधल जडेजा ने भी भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया। लेकिन सरकार के कृषि मंत्री आर सी फलदू का ही मत रद्द हो गया।

चुनाव से पहले क्रॉस वोटिंग के भय से कांग्रेस अपने सभी विधायकों को पालनपुर के बालाराम पैलेस ले गई थी। अल्पेश व धवलसिंह के क्रॉस वोटिंग की शिकायत चुनाव आयोग से की गई लेकिन आयोग ने कांग्रेस की मतगणना रोकने की मांग के साथ अर्जी भी ठुकरा दी। कांग्रेस के पूर्व सांसद जगदीश ठाकोर ने कहा कि जनता व कांग्रेस को धोखा देने वाले दोनों विधायक गद्दार हैं, इन्होंने अपने निजी स्वार्थ के लिए सबके साथ धोखा किया है, जनता इनको सबक सिखाएगी। अल्पेश ठाकोर व झाला ने क्रॉस वोटिंग के तुरंत बाद विधानसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा भी दे दिया। झाला ने कांग्र्रेस के सभी पदों से भी इस्तीफा दे दिया। ठाकोर ने इसी साल अप्रैल में कांग्र्रेस के सभी पदों से भी इस्तीफा दे दिया था।

कांग्रेस है डूबती नाव

राधनपुर से विधायक चुने गए अल्पेश ने इस्तीफा देने के बाद कहा कि कांग्रेस में शामिल होना उनकी भूल थी। कांग्रेस एक डूबती नैया है, जिसके हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। अल्पेश ने कांग्रेस की अंदरुनी राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनके लिए कुछ नहीं किया। राहुल ने पार्टी की अंदरुनी राजनीति से बचाने का वादा किया था। अल्पेश ने कांग्रेस के नेताओं को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें धमकी देने के बजाए नेता राधनपुर में आकर उनके खिलाफ चुनाव लड़कर देख लें।