अहमदाबाद। गुजरात राज्य उपभोक्ता अदालत ने शहर के एक न्यूरोसर्जन को स्ट्रोक के रोगी का गलत उपचार करने की सजा सुनाई है। सजा को तौर पर कोर्ट ने ये आदेश दिया है कि, न्यूरोसर्जन को इलाज में लगी अब तक पूरी राशि 9% ब्याज के साथ लौटानी होगी। इस आधार पर न्यूरोसर्जन को 4 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया गया है। जानकारी के अनुसार, गलत इलाज की वजह से मरीज को पैरालिसिस जैसी गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ा।

मरीज हेतल भावसार ने बताया कि, डॉ दिपाल पटेल स्ट्रोक के लक्षणों के नहीं पहचान पाए थे। डॉक्टर ने बिना मेरी हिस्ट्री लिए और परामर्श के मुझे विटामिन बी 12 की गोलियां और इंजेक्शन दे दिया। गलत इलाज की वजह से मुझे पैरालिसिस जैसी गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ा। रोगी हेतल भावसार ने आरोप लगाया कि नवरंगपुरा स्थित न्यूरो सर्जन डॉ. दिपाल पटेल ने ब्रेन स्ट्रोक के बारे में बताए जाने के बावजूद विटामिन बी 12 की पर्ची दे दी। डॉ. पटेल के इलाज के बाद मुझे पैरालिसिस अटैक आया और मेरे शरीर का दाहिना हिस्सा पैरालाइज्ड हो गया।

साल 2006 में भावसार ने गांधीनगर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम के समक्ष डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। साल 2011 में डॉ. पटेल को 9% ब्याज के साथ रोगी को इलाज के लिए भुगतान करने का आदेश दिया गया। इतना ही नहीं फोरम ने कानूनी खर्चों के लिए रोगी को 5,000 रुपये का भुगतान करने के लिए भी कहा। उधर, डॉक्टर ने आदेश को गुजरात राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के समक्ष चुनौती दी। डॉक्टर ने खुद का बचाव करते हुए यह तर्क दिया कि भावसार ने अपनी बीमारी का इतिहास उन्हें नहीं बताया था। यहीं नहीं डॉक्टर ने यह भी कहा कि बी 12 की कमी के लिए दवा देना लापरवाही का काम नहीं है।