अहमदाबाद। मेट्रो मैन के नाम से विख्यात ई. श्रीधरन ने गुरुवार को इस बात पर अफसोस व्यक्त किया कि देश के इंजीनियरिंग संस्थानों से "बेहद घटिया" इंजीनियर निकल रहे हैं। साथ ही विरोधाभास यह है कि आइआइटियन्स उच्च शिक्षा या बेहतर रोजगार के लिए विदेश का रुख कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने आधारभूत परियोजनाओं के लिए 5,000 अरब (पांच ट्रिलियन) का लक्ष्य रखा है और इसके लिए देश को बेहद शिक्षित इंजीनियरों की जरूरत होगी।

इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) की ओर से आयोजित एक व्याख्यान में श्रीधरन ने कहा, "हमारे देश में इंजीनियर आसानी से नहीं बनते। हम अपने को अप-टू-डेट रखने के लिए भी पर्याप्त कोशिश नहीं कर रहे। देश में हमारे इंजीनियरिंग कॉलेज और संस्थान, मेरे मुताबिक बेहद घटिया गुणवत्ता के इंजीनियर बना रहे हैं।"

कोंकण रेल और दिल्ली मेट्रो जैसी चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले और पद्मविभूषण से सम्मानित श्रीधरन ने एक पत्रिका की ओर से 300 इंजीनियरिंग कॉलेजों में कराये गए सर्वेक्षण का भी हवाला दिया।

उन्होंने बताया कि इस सर्वेक्षण में इन कॉलेजों के 29 प्रतिशत इंजीनियरों को रोजगार योग्य और 30 प्रतिशत को आगे के अध्ययन के बाद रोजगार योग्य बनाने लायक पाया गया। जबकि, 48 प्रतिशत रोजगार योग्य ही नहीं थे। उन्होंने कहा, यह तो देश में मिल रही शिक्षा का स्तर है। क्या यह पर्याप्त है? इंजीनियरिंग के पेशे में जानकारी ही सबसे महत्वपूर्ण चीज है। आपको विशेषज्ञ होना चाहिए। जानकारी भी ऐसी होनी चाहिए जो व्यवहारिक हो।

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