शत्रुघ्‍न शर्मा, अहमदाबाद। गुजरात से एक अच्‍छी और समाज को सीख देने वाली खबर सामने आई है। यह खास इसलिए भी है क्‍योंकि एक प्रसिद्ध व्‍यक्ति ने इस नेक परंपरा की शुरुआत की। सामाजिक प्रतिष्‍ठा होने के बावजूद इस शख्‍स ने अपने बेटे की शादी इतनी सादगी से की है कि मिसाल कायम कर दी है। फिजूलखर्ची के चलन के खिलाफ संदेश देने के लिए उन्‍होंने अपने करीबियों तक को सूचना नहीं दी। सादगी यानी सादगी। बसंत पंचमी पर बेटे का घर बसाकर उन्‍हें इस बात का संतोष है कि उन्‍होंने एक नेक काम किया क्‍योंकि उन्‍होंने एक निर्धन परिवार की बेटी को अपनाया है। अब इस शादी की खबर सबको लगी है तो सब इस कदम की सराहना करते नहीं थक रहे।

गुजरात में नशाबंदी व बेरोजगारी के मुद्दे पर आंदोलन कर चर्चित हुए Alpesh Thkore अल्‍पेश ठाकोर ने वसंत पंचमी के दिन अपने बेटे उत्‍सव का सादगीपूर्ण तरीके से घर में ही विवाह संपन्‍न करा दिया। अल्‍पेश ने अपने करीबी मित्रों को भी नहीं बुलाकर समाज में मितव्‍ययता का संदेश देने की कोशिश की है।

ओबीसी एकता मंच के संयोजक व पूर्व विधायक अल्‍पेश ठाकोर के पुत्र उत्‍सव का विवाह बसंत पंचमी 30 जनवरी को बनासकांठा के थराद गांव की लडकी उर्वी के साथ संपन्‍न हुआ। अल्‍पेश ने यह विवाह बहुत सादगी पूर्ण तरीके से घर में ही संपन्‍न कराया तथा अपने सगे संबंधी तथा करीबी मित्रों को भी इसकी जानकारी नहीं दी। उर्वी ने बचपनमें ही पिता दिनेश भाई ठाकोर का साया खो दिया था, लेकिन अब अल्‍पेश के परिवार की सदस्‍य बनकर बहुत खुश हैं, उत्‍सव ने कॉलेज शिक्षा केबाद अब अहमदाबाद में अपना बिजनेस शुरू किया है।

नशाबंदी आंदेालन से लेकर कांग्रेस में शामिल होकर चुनाव लड़ने तथा विधानसभा से इस्‍तीफा देकर उपचुनाव में भाजपा से चुनाव लड़ने तक साथ रहने वाले करीबी दोस्‍त पूर्व विधायक धवलसिंह झाला को भी इसकी जानकारी नहीं थी। बीते साल अल्‍पेश राधनपुर से विधानसभा का उपचुनाव हार गए थे। विवाह के जरिए एक बार फिर वे समाज में चर्चा का विषय बन गए हैं। कुछ माह पहले ही अल्‍पेश ने अहमदाबाद में भतीजे की शादी धूम धाम से संपन्‍न कराई थी जिसमें राजनीति से लेकर विविध क्षेत्र के कई नामी गिरामी लोगों ने शिरकत की थी।

कांग्रेस से राजनीति की पारी खेलने वाले Alpesh Thkore के पिता खोडाजी ठाकोर कांग्रेस के गांधीनगर जिले के अध्‍यक्ष रह चुके हैं, खुद अल्‍पेश ने 2017 में कांग्रेस के टिक्‍ट पर राधनपुर से विधानसभा चुनाव जीता था लेकिन बाद में इस्‍तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए लेकिन 2019 में उपचुनाव में वे अपनी जीत को दोहरा नहीं सके थे।

Posted By: Navodit Saktawat

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