शत्रुघ्न शर्मा, अहमदाबाद

महानगर के पॉश इलाके के पास बसी एक चाली में बचपन से साथ रह रहीं दो युवतियों के समलैंगिकों की तरह साथ रहने के लिए परिजनों का त्याग कर दिया। नारी संरक्षण गृह से जब एक युवती को स्थानीय अदालत में पेश किया तो उसने परिजनों के साथ जाने के बजाए अपनी साथी के साथ जाना पसंद किया, युवती को पुलिस अभिरक्षा से निकालने के लिए उसकी साथी की मां ने गुजरात न्यायालय में गुहार लगाई थी।

अहमदाबाद के ओढव इलाके की एक बस्ती में रेखा व सुमन (नाम परिवर्तित) बचपन से साथ रह रही थीं कई वर्षों से साथ रहने के कारण दोनों के बीच रिश्ता बन गया। रेखा का रहन सहन लड़कों जैसा था जिसके चलते सुमन के माता-पिता अक्सर उसे रेखा के साथ ज्यादा नहीं रहने की हिदायत देते रहते थे।

रोक-टोक से पिछले वर्ष सुमन रेखा के ही घर पर रहने लगीं तो उसके परिजनों ने पिछले महीने पुलिस को शिकायत कर सुमन को नारी संरक्षण

गृह भिजवा दिया। सुमन को नारी संरक्षण गृह से निकालने के लिए उसके परिजन तो आगे नहीं आए लेकिन रेखा व उसकी मां ने स्थानीय अदालत में याचिका दायर कर सुमन को मुक्तकरने की मांग की। अतिरिक्त मुख्य न्यायाधीश के समक्ष जब सुमन को पेश किया गया तो उसने अदालत को बताया कि वह अपनी महिला मित्र रेखा के साथ ही रहना चाहती है। उसने स्वीकार किया कि वे दोनों समलैंगिक संबंध रखती हैं और उन्हें अब अपने परिवार वालों के साथ नहीं जाना है।

सुमन ने बताया कि परिवार वालों ने उससे वादा किया था कि पढ़ाई पूरी होने के बाद उसे रेखा के घर भेज देंगे। लेकिन बीते 21 अप्रैल को पुलिस के हवाले कर दिया और दोनों के साथ मारपीट भी की। अदालत ने दोनों को बालिग बताते हुए साथ रहने की मंजूरी दे दी जिसके बाद सुमन अपनी साथी के साथ चली गई।

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