अहमदाबाद। रामकथा वाचक संत मोरारी बापू ने स्‍वामीनारायण सम्प्रदाय के साथ नीलकंठवर्णी मुद्दे पर उपजे विवाद को लेकर मध्‍यस्‍थता की पहल और क्षमा मांगने की नसीहत देने वालों को आड़े हाथ लिया। बापू ने कहा है कि होशियार बनने की जरूरत नहीं है, उन्होंने सनातन सत्‍य ही सामने रखा है। जानिए क्या है पूरा मामला -

मोरारी बापू ने जामनगर में रामकथा के दौरान कहा था कि नीलकंठवर्णी तो वो थे जिसने जहर पीया था, लाडू खाने वाले नीलकंठवर्णी नहीं हो सकते। स्‍वामी नारायण सम्प्रदाय के संत बापू के इस कथन से नाराज हो गए थे। चूंकि इस सम्प्रदाय के आराध्‍य भगवान स्‍वामी नारायण के किशोर रूप को नीलकंठवर्णी के रूप में पूजा जाता है।

इसके बाद कई संतों, कवि, गायक व साहित्‍यकार उनके समर्थन में आ गए। लोक गायक माया भाई आहीर, अनुभा गढवी, साहित्‍यकार काजल ओझा, जय वसावडा आदि ने बापू के समर्थन में स्‍वामी नारायण संप्रदाय को रत्‍नाकर अवार्ड लौटा दिए थे।

अब बापू भड़के

अब जामनगर में रामकथा वाचन के दौरान ही मोरारी बापू ने सबको जवाब दिया। कहा, 'भीख में मिली हुई क्षमा को क्षमा नहीं कहा जाता। बोला हो वह क्षमा मांगे, जिसने कुछ कहा ही नहीं वो क्‍यों ऐसा करे। क्षमा मांगना होगा तो सनातन, पवित्र व पारंपरिक सत्‍य से क्षमा मांग सकता हूं। मैं आज हूं, कल नहीं, ईश्‍वर की कृपा है इसलिए गर्व के साथ घूमता हूं। मेरे सिर पर पादुका, हाथ में पोथी और पैरों में नितांत शरणागति है।'

'मैं इन बातों पर ध्‍यान नहीं देता, मैंने कोई तकरार शुरू नहीं की।' बापू ने तीखे शब्‍दों में उन लोगों को भी आड़े हाथ लिया जो उनहें नीलकंठवर्णी विवाद को लेकर क्षमा मांगने की नसीहत दे रहे हैं। बापू ने साफ चेताया कि किसी को होशियारी करने की जरूरत नहीं है।

Posted By: Arvind Dubey