अहमदाबाद। गुजरात सरकार ने गैरसचिवालय लिपिक पदों पर भर्ती परीक्षा को रद्द करने के अपने ही फरमान को पलटते हुए अब 3771 पदों पर भर्ती के लिए 17 नवंबर को परीक्षाएं कराने का ऐलान किया है। डेढ़ साल पहले इन पदों के लिए 10 लाख से अधिक ने आवेदन किया था। मुख्‍यमंत्री रूपाणी के गांधीनगर में सरकारी आवास पर बुधवार को अचानक आला अधिकारियों की बैठक बुलाई गई जिसमें मुख्‍यमंत्री कार्यालय के उच्‍च अधिकारियों समेत गुजरात गौण सेवा पसंदगी मंडल, सामान्‍य प्रशासन विभाग के अधिकारी भी शामिल हुए। गैरसचिवालय वर्ग के 3771 पदों के लिए आयोजित परीक्षा को रद्द करने के बाद सरकार के खिलाफ जनता व युवाओं में फूटे गुस्‍से को देखते हुए सरकार ने अपने फैसले को पलटते हुए अब 17 नवंबर 2019 को परीक्षा कराने का ऐलान किया है।

उपमुख्‍यमंत्री नीतिन पटेल ने बताया कि पूर्व में पंजीकृत 12वीं उत्‍तीर्ण व स्‍नातक दोनों ही अभ्‍यर्थी इसमें शामिल हो सकेंगे। उन्‍होंने कहा लोकसभा चुनाव के चलते यह परीक्षा नहीं हो सकी। इसके बाद केंद्र सरकार की ओर से आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग ईडब्‍ल्‍यूएस को आरक्षण के अमल के चलते परीक्षा में देरी हुई। अब परीक्षार्थी बुधवार से ही अपना कॉल लेटर वेबसाइट से डाउनलोड कर सकेंगे। सरकार ने गत वर्ष भी 70 हजार युवक युवतियों को सरकारी नौकरी दी थी।

सरकार ने बिन सचिवालय लिपित वर्ग के 3771 पदों के लिए करीब डेढ़ साल पहले आवेदन मांगे थे। 20 अक्‍टूबर को यह परीक्षा आयोजित की जानी थी लेकिन 12 अक्‍टूबर को सरकार ने इन पदों पर स्‍नातक युवाओं को ही नियु‍क्‍त करने का फैसला करते हुए पूर्व निर्धारित परीक्षा को रद्द कर दिया।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद एबीवीपी, भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन एनएसयूआई, कई गैरसरकारी संगठन व संस्‍थाओं ने सरकारके इस फैसले का विरोध किया जिसके बाद बुधवार को सरकार ने अपना निर्णय बदल लिया। कांग्रेस के मुख्‍य प्रवक्‍ता मनीष दोशी ने परीक्षा रद्द करने पर सरकार को आड़े हाथ लेते हुए इसे गुजरात सरकार के व्‍यापमंं घोटाले तक की संज्ञा दे डाली थी, कांग्रेस ने परीक्षा रद्द करने को लेकर राज्‍यभर में विरोध प्रदर्शन भी शुरू कर दिए थे।

Posted By: Navodit Saktawat