अहमदाबाद (ब्यूरो)। गुजरात सरकार ने लोकायुक्त पद पर जस्टिस आरए मेहता की नियुक्ति पर रोक लगाने के लिए चली अदालती जंग में 45 करोड़ रुपए खर्च करने की जानकारी अखबारों में प्रकाशित होने के बाद अब राज्यपाल कार्यालय की ओर से वकीलों की फीस के बारे में खुलासा हुआ है। आरटीआई से मांगी गई जानकारी में पता चला है कि वकीलों को दिए गए फीस के रूप में 87 लाख रुपए खर्च किए गए हैं।

राज्यपाल कार्यालय की ओर से लोकायुक्त का केस लड़ने के लिए नई दिल्ली की एडवोकेट्स कंपनी मेसर्स आरपी कपूर एंड कंपनी को 24,39,719 रुपए, सॉलिसीटर जनरल रोहिंग्टन एफ नरिमन को 61,06,650 तथा एडवोकेट रितिन राय को 1,43,000 रुपए दिए गए।

इस प्रकार कुल मिलकर वकीलों को फीस के तौर पर 86,89,3369 रुपये खर्च किए गए थे। यह राशि राज्यपाल के सेक्रेटेरियट को आवंटित बजट में से खर्च किए गए थे। आरटीआई के तहत दी गई जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार ने लोकायुक्त का केस लड़ने के लिए गुजरात उच्च न्यायालय से लेकर सर्वोच्च अदालत तक कुल 21 वकील नियुक्त किए थे।

पूर्व मुख्यमंत्री सुरेश मेहता का कहना है कि लोकायुक्त पद पर जस्टिस आरए मेहता की नियुक्ति रोकने के लिए गुजरात सरकार ने कानूनी जंग लड़ने के लिए जनता के पैसे का पानी की तरह इस्तेमाल किया है। नव नियुक्त लोकायुक्त इस मुद्दे पर भी जांच करें। उल्लेखनीय है कि यह केवल वकीलों की फीस के बारे में जानकारी दी गई है। जबकि फाइवस्टार होटलो में वकीलों के रहने के लिए रूम चार्ज, हवाई टिकट में किए गए खर्चों के बारे में जानकारी नहीं दी गई है।

Posted By:

  • Font Size
  • Close