अहमदाबाद। Makar Sankranti 2020 : हर साल की तरह इस बार भी गुजरात में संक्रांति का पर्व बड़े पैमाने पर मनाई जाएगी लेकिन इस बार कुछ खास और अच्‍छा होने जा रहा है। पतंग की डोर में उलझकर हर साल कई पक्षियों की मौत हो जाती है। इस दिशा में अब सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। आने वाली सक्रांति पर पक्षियों को बचाने के लिए सैकड़ों पशु-चिकित्‍सकों की तैनाती की जाएगी।

उतरायण के दौरान पतंग के मांझे से घायल पक्षियों को बचाने के लिए गुजरात सरकार पशुपालन, स्वास्थय, और वन विभाग तथा स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से 10 से 20 जनवरी तक 10 दिनों के लिए करूणा अभियान चलायेगी। इस दौरान 503 पशुचिकित्सक, एवं 8441 स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से राज्य में 825 टीमें कार्यरत रहेंगी। इस करूणा अभियान में वन विभाग के 2843 कर्मचारी भी काम करेंगे। राज्य में 1962 टोल फ्री नम्बर पर फोन कर सहायता प्राप्त की जा सकेगी। राज्य के मुख्यमंत्री 12 जनवरी को इसका उद्घाटन करेंगे।

राज्य के वनमंत्री गणपत वसावा ने बुधवार को कैबिनेट बैठक के बाद यह जानकारी दी। पत्रकारों से बातचीत करते हुए वसावा ने बताया कि देश में गुजरात विविध त्योहारों उत्सव एवं पर्वों के लिए मशहूर हैं। राज्य में उतरायण पर्व मनाने के लिए जनता बड़े पैमाने पर हर्षोल्लास के साथ शामिल होती है। उतरायण के दौरान पतंग के मांझे से घायल होने वाले पक्षियों को बचाने, उन्हें यथासमय चिकित्सा उपलब्ध करवाने के लिए राज्य सरकार गत तीन वर्ष से करूणा अभियान चला रही हैं। इसका अभियान के लिए वन, पशुपालन एवं शिक्षा विभाग द्वारा संकलन कर विविध सेवाएं उपलब्ध करवायी जा रही हैं। इस बार 10 से 20 जनवरी के दौरान करूणा अभियान चलाया जायेगा।

सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक चलेगा यह अभियान

इस अभियान में सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक वनविभाग द्वारा तहसील स्तर पर कन्ट्रोल रूम कार्यरत रखा जायेगा। कन्ट्रोल रूम में मानव बल, वाहन, तथा संचार की सुविधा सहित विविध ढांचागत सुविधाएं मुहैया करवायी जायेंगी। कन्ट्रोल रूम में जानकारी मिलते ही घायल पक्षियों की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवायी जायेगी।

वसावा ने बताया कि इस बार राज्य में 470 चिकित्सा केन्द्र, विविध स्वयंसेवी संगठनों के 8441 स्वयंसेवक तथा वन विभाग के 2843 कर्मचारी तैनात किए जायेंगे। घायल पक्षियों का रेस्कयू तथा चिकित्सा के लिए 854 टीम तथा कटे पतंग की डोरी निकालने के लिए 758 टीमों का गठन किया गया हैं।

दुर्घटना के कारण घायल पशु-पक्षियों तथा आपातकालीन मामलों के लिए पशुपालन निदेशक द्वारा करूणा एनिमल एंबुलेंस 1962 की शुरूआत की गयी हैं। यह राज्य के सभी जिलों में उपलब्ध होगी। इस बार इस करूणा अभियान के तहत महानगरपालिका क्षेत्र तथा जिला एवं ग्रामीण सहित तहसील स्तर पर काम किया जायेगा।

अवेयरनेस के लिए लगाए 500 से ज्‍यादा होर्डिंग्‍स

इस बारे में जनजागृति के लिए राज्य में 520 होर्डिंग्स तथा वडोदरा, राजकोट, सूरत जैसे मुख्य शहरों में 36 एलइडी एवं वडोदरा, आणंद, भरूच, सूरत और अहमदाबाद जैसे मुख्य रेलवे स्टेशनों पर वीडियो वाल, मुख्य रेलगाड़ियों के डिब्बे के पैनल पर चार एफ.एम.चैनल पर रेडियो जिंगल, 21 गुजराती तथा चार अंग्रेजी अखबारों में जागृति संदेश एवं टीवी पर विज्ञापन की व्यवस्था की गयी हैं।

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