अहमदाबाद। अदालतों में चलने वाले केसों की लेट लतीफी के कई मामले सामने आते हैं, ऐसे ही एक 33 साल पुराने मामले में हाईकोर्ट ने तलाक मंजूर कर लिया लेकिन अब पति व पत्‍नी रिटायर हो चुके हैं, दूसरी पत्‍नी से तीन बच्‍चे भी हो चुके हैं। तलाक कानूनन मंजूर हुआ तो 28 साल बाद दूसरी शादी को भी वैधानिकता मिल गई।

तीन दशक से अदालत से तलाक की राह देख रहे इस दंपती को वैसे तो अदालत से तलाक की औपचारिक ही जरूरत रह गई थी, इसीलिए पहली पत्‍नी ने अपने परिवार व दूसरी पत्‍नी से उत्‍पन्‍न तीन बच्‍चों को सामाजिक बदनामी से बचाने के लिए खुद ही इसकी पहल की तो मामला सुलझ गया।

बीमा कंपनी में काम करने वाले धनजीभाई परमार का विवाह वन 1978 में इंदिराबेन के साथ हुआ था। इंदिरा राज्‍य सरकार की नौकरी करती थी। दोनों को 1983 में एक बेटा भी हुआ। परिवार में तकरार के चलते धनजीभाई ने 1986 में अहमदाबाद की सिविल कोर्ट में तलाक की अर्जी लगाई, फरवरी 1988 में आंशिक रूप से तलाक की मंजूरी मिलते ही धनजीभाई ने रमीलाबेन नामक महिला के साथ विवाह कर लिया।

नवदंपती को तीन बच्‍चे हो गए लेकिन पति अभी तक तलाक के केस में उलझा हुआ था। आखिर पहली पत्‍नी ने परिवार को सामाजिक बदनामी से बचाने के लिए तलाक पर सहमति दी। साथ ही उसके वकील ने अदालत को बताया कि पति ने इस दौरान अपनी पत्‍नी को भरण पोषण नहीं दिया है, पत्‍नी के पास रहने के लिए खुद का घर भी नहीं है। इस हाईकोर्ट ने तलाक की मंजूरी देते हुए पति को अपनी पहली पत्‍नी को 17 लाख रु देने का आदेश किया।

Posted By: Ajay Barve

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