सूरत (ब्यूरो)। दुष्कर्म के आरोपी नारायण साईं को लेकर सूरत पुलिस गुरुवार सुबह दिल्ली से सूरत लेकर आ गई। कड़ी सुरक्षा के बीच उसे सूरत एयरपोर्ट से क्राइम ब्रांच के ऑफिस लाया गया। यहां अधिकारियों ने उससे बारी-बारी से पूछताछ की। रिमांड की अर्जी पर सुनवाई के लिए उसे कोर्ट में भी पेश किया गया।

इस दौरान वह बड़े आराम से दोनों पक्षों की दलीलें सुन रहा था। उसके चेहरे पर किसी तरह का पछतावा नजर नहीं आ रहा था। बहरहाल रिमांड अर्जी पर तकरीबन चार घंटे तक चली दलील के बाद अदालत ने गुरुवार रात तकरीबन 11ः30 बजे अपना फैसला सुनाते हुए नारायण साईं और उसके करीबी साधक हनुमान को 11 दिसंबर और ड्राइवर रमेश को 7 दिसंबर तक की पुलिस रिमांड में भेज दिया है।

दोपहर बाद तकरीबन 4 बजे सिविल अस्पताल में नारायण की मेडिकल जांच करवाई गई। डेढ़ घंटे की जांच के बाद पुलिस ने तकरीबन 5 बजे रिमांड के लिए उसे कोर्ट में पेश किया। सूरत की कोर्ट में तीन दिवसीय वकीलों की हड़ताल के चलते नारायण के वकील कल्पेश देसाई ने कहा कि वह हड़ताल की वजह से अपने मुवक्किल की जिरह नहीं कर सकते इसलिए शुक्रवार का समय दिया जाए, मगर उनकी मांग ठुकरा दी गई। अदालत ने कहा कि हड़ताल वकीलों को निजी मामला है इसलिए इस केस में इंतजार नहीं किया जा सकता है।

इसके बाद कल्पेश ने नारायण का पक्ष रखने के लिए समय मांगा। अदालत ने उन्हें एक घंटे का समय दिया। तकरीबन छह बजे के बाद नारायण की रिमांड अर्जी पर सुनवाई शुरू हुई।

नारायण के ड्राइवर रमेश मल्होत्रा भी गिरफ्तार हुआ है। सरकारी पक्ष ने दलील दी कि रमेश भी लकड़ियों को लालच देकर नारायण तक पहुंचाता था। इससे एक बड़े सेक्स स्कैंडल का पता चला है, जिसकी तह तक जाने के लिए रमेश के रिमांड की भी जरूरत है।

पुलिस रिमांड के लिए सरकारी पक्ष की दलील

सूरत जिला अदालत के मुख्य सरकारी वकील नयन सुखडवाला ने अदालत से रिमांड अर्जी पर कहा कि नारायण एफआईआर के बाद 58 दिनों से फरार था। इस बीच वह कहां-कहां और किन राज्यों में रहा। उसे किसने संरक्षण दिया। इसकी जांच के लिए उसे दूसरे राज्यों में ले जाना पड़ेगा। सूरत के जहांगीरपुरा थाने में दर्ज मामले के चार आरोपियों में से नारायण, कौशल ठाकुर उर्फ हनुमान और साधिका गंगा गिरफ्तार हो चुके हैं, जबकि चौथी आरोपी जमुना अब भी फरार है। इसकी जानकारी हासिल करने के लिए पुलिस को उसकी रिमांड की जरूरत है। एफआईआर के बाद नारायण के साधकों की ओर से पीड़िता, गवाहों और जांच अधिकारी आईपीएस शोभा भूतड़ा को भी धमकाने और अग्रिम जमानत के लिए फर्जी एफिडेविट देने का आरोप है। वकील नयन ने दलील दी कि इन मामलो में नारायण और उसके साधक हनुमान से पूछताछ करनी जरूरी है। इसलिए अदालत 14 दिन की रिमांड की मंजूरी प्रदान करे।

बचाव पक्ष की दलील

नारायण के वकील कल्पेश देसाई ने अदालत में दलील दी कि जिन मामलों पर पुलिस 14 दिन की रिमांड मांग रही है, उनमें से अधिकतर में पुलिस 12 आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर चुकी है। पुलिस की रिमांड अर्जी में कुछ नया नहीं है। बचाव पक्ष ने कहा कि नारायण को लेकर पुलिस देश में अलग-अलग जगहो पर ले जाने की बात कर रही है मगर नारायण इन 58 दिनों में कहां-कहां गए यह बात मीडिया में पहले से आ चुकी है। इसके लिए उन्हें उन जगहों पर ले जाने की जरूरत नहीं है।

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