अहमदाबाद (प्रे)। भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कुछ मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर आग्रह किया कि वे राजनीतिक संबद्धता से ऊपर उठें और केंद्र के प्रस्तावित सांप्रदायिक हिंसा विधेयक का विरोध करें। उन्होंने आरोप लगाया कि यह राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में खुल्लम-खुल्ला अनुचित हस्तक्षेप है।

मोदी ने यह पत्र प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर एक दिन पहले पत्र लिखने के बाद लिखा है जिसमें उन्होंने इस विधेयक को तबाही का का तरीका करार दिया था। मुख्यमंत्रियों को भेजे पत्र में गुजरात के मुख्यमंत्री ने लिखा है, 'यह सभी मुख्यमंत्रियों के लिए महत्वपूर्ण है कि राजनीतिक संबद्धताओं से ऊपर उठें और इस विधेयक के विरोध के लिए एकजुट हों। यह विधेयक कुछ और नहीं केंद्र द्वारा निर्वाचित राज्य सरकारों के अधिकारों में हस्तक्षेप का प्रयास है।'

उन्होंने कहा कि इस विधेयक से समाज का धु्रवीकरण होगा और इससे धर्म और भाषाई पहचान के आधार पर नागरिकों पर आपराधिक कानून लागू करने में अंतर करने का विचार पैदा होगा। यह लोकसेवकों को भी हतोत्साहित करेगा। शुक्रवार को इस पत्र को पाने वालों में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री पृथ्वीराज चह्वाण, मणिपुर के मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह, मेघालय के मुख्यमंत्री मुकुल संगमा भी शामिल हैं।

संप्रग सरकर इसी शीतकालीन सत्र में प्रिवेंशन ऑफ कम्यूनल वायलेंस (एसेस टू जस्टिस रेपरेशंस) बिल 2013 को पेश करने की योजना बनाई है। पत्र में मोदी ने अन्य राज्यों के अपने समकक्षों से इस विधेयक पर विमर्श करने व इसका विरोध करने की अपील की है।

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