अहमदाबाद/नई दिल्ली (एजेंसी)। भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के विदेशी मुरीदों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। इस कड़ी में नया नाम जुड़ा है पाकिस्तानी मूल के कनाडाई लेखक तारिक फतेह का।

कनाडाई अखबार में लिखे लेख में फतेह ने माना है कि अगले आम चुनाव के बाद अगर मोदी प्रधानमंत्री बने तो पाकिस्तान और चीन के अलावा पाकिस्तान पोषित आतंकवाद के खिलाफ भारत का रुख कड़ा रहेगा। 'भारत के लिए बढ़िया रहेंगे मोदी' शीर्षक से लिखे लेख में फतेह ने कहा है कि अगले साल मई के बाद दस साल तक कमजोर तरीके से देश चलाने वाले मनमोहन सिंह की सरकार का यह कार्यकाल अंतिम होगा। इस चुनाव के बाद भाजपा लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में आ सकती है और इसके मुखिया होंगे नरेंद्र मोदी। अगर मोदी पीएम बने तो दुनिया को कड़े रुख वाले नई दिल्ली से व्यवहार करना होगा। अफगानिस्तान, चीन और पाकिस्तान से मिलने वाली चुनौतियों से भी यह कड़ाई से निपटेगा।

संप्रग की विदाई का इंतजार

उन्होंने लिखा, 'पिछले दिनों में उत्तर प्रदेश के आगरा से हरियाणा और पंजाब होते हुए श्रीनगर पहुंचा। करीब 2000 किलोमीटर की यह यात्रा सड़क मार्ग से तय की। इस दौरान रास्ते में ग्रामीण, कैब और ट्रक चालक, चाय बेचने वाले और पांच सितारा होटलों के वेटरों से मिला। मुझे एक भी सत्ताधारी पार्टी का उत्साहित समर्थक नहीं मिला। ज्यादातर भारतीय जिनमें हिंदू, सिख और कुछ मुस्लिम भी शामिल हैं, बड़ी बेचैनी के साथ कांग्रेस नीत सरकार की विदाई का इंतजार कर रहे हैं। मैंने लखनऊ में एक वेटर से पूछा क्या मुस्लिम होने के नाते वह नरेंद्र मोदी को समर्थन देगा। इसके जवाब में उसने कहा कि कांग्रेस हम मुस्लिमों को इस्तेमाल करती है। जबकि मोदी कोई सांप्रदायिक हिंसा की घटना नहीं होने देंगे। उसने कहा कि 2002 के बाद मोदी के राज में गुजरात में एक भी मुस्लिम विरोधी दंगा नहीं हुआ। वेटर के सिख सहयोगी ने कहा कि मोदी भारत के लिए बढ़िया रहेंगे।

भारत का रुख हाथी जैसा

उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में पाकिस्तान, चीन और पाक पोषित आतंकवाद से निपटने में अगर भारत का रुख कायराना नहीं तो घबराहट वाला जरूर रहा है। मुंबई में आतंकवादी हमला हो या सीमा पर सैनिकों के सिर काटे जाने की घटना, भारत का रुख वैसा ही रहा है जैसे चूहे के उकसाने पर हाथी का रहता है। हालांकि मोदी के रास्ते में मुस्लिम वोट बैंक को रोड़ा बताया जा रहा है। माना जाता है कि भारतीय मुस्लिम 2002 की घटना को नहीं भूले हैं।

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