अहमदाबाद। आश्रम की साधिकाओं के साथ दूष्‍कर्म के मामले में सेशन कोर्ट के आजीवन कैद के फैसले को नारायण सांई ने गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी है। सांई के वकील ने बताया कि आसाराम व उनके पुत्र सांई को एक साजिश के तहत फंसाया गया है।

गुजरात उच्‍च न्‍यायालय के न्‍यायाधीश हर्षा देवाणी व न्‍यायाधीश वीबी मायाणी की अदालत ने सांई की याचिका को स्‍वीकारते हुए गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया है। हालांकि अदालत ने याचिका दाखिल करने में 46 दिन की देरी को भी ग्राह्रय रखा।

सांई के वकील रफीक लोखंडवाला ने बताया कि सूरत सेशन कोर्ट ने सूरत की एक साधिका से दुष्‍कर्म के मामले में 30 अप्रेल 2019 को नारायण सांई को आजीवन कैद व 5 लाख रु के जुर्माने की सजा सुनाई है। याचिका में कहा गया है कि सांई के खिलाफ गलत तरीके से यह केस दर्ज किया गया है, पीड़िता की बड़ी बहन ने सांई के पिता आसाराम पर दूष्‍कर्म का आरोप लगाया है।

उनका कहना है कि पिता पुत्र के खिलाफ एक साजिश के तहत मुकदमा दर्जकिया गया। इस मामले में कोई तथ्‍य नहीं है, दस साल बाद अपराध की शिकायत दर्ज की गई जबकि ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं। पीडिता के आरोपोंको प्राथमिक द्रष्‍टया साबित करते हों ऐसे कोई सबूत का अभाव है जो पुलिस जांचपर भी कई सवाल पैदाकरते हैं।

लोखंडवाला का कहना है कि सैशंस कोर्ट का फैसला दोषपूर्ण है, इसलिए उसके फैसले को रद्द किया जाना चाहिए। इन दलीलों के बाद हाइ्रकोर्ट ने सांईकी अर्जी को देरी से आने के बावजूद स्‍वीकार कर ली है। गौरतलब है कि दुष्‍कर्म केमामले में सांई को आजीवन कैद जबकि उसकी सहयोगी साधिकाओं गंगा, जमना व साधक हनुमान को 10-10 साल की सजा सुनाई गई है। साथ ही सांईके ड्राइवर रमेश मल्‍होत्रा को भी 6 माह की सजा सुनाई गई। अदालत ने सांई की याचिका को स्‍वीकारते हुए गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया है आगामी दि नों में इस पर सुनवाई होगी।

Posted By: Arvind Dubey