अहमदाबाद। गुजरात में पेशे से आर्किटेक्ट बताई जा रही एक युवती की जासूसी कराने का मुद्दा मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का पीछा नहीं छोड़ रहा है। शनिवार को इसकी गूंज सुप्रीम कोर्ट में सुनाई दी। गुजरात सरकार द्वारा निलंबित आईएएस अधिकारी प्रदीप शर्मा ने यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उठाया है। राज्य सरकार से कानूनी जंग लड़ रहे शर्मा ने इस प्रकरण में मोदी और उनके करीबी अमित शाह के खिलाफ सीबीआई जांच कराने की अदालत से मांग की है। उनका कहना है कि लड़की की जासूसी गैरकानूनी तरीके से की गई।

शीर्ष न्यायालय में याचिका दायर कर शर्मा ने उक्त प्रकरण को उठाया है। उन्होंने याचिका में दावा किया कि अदालत को इस बारे में कुछ न्यूज पोर्टल द्वारा प्रसारित ऑडियो टेप का संज्ञान लेना चाहिए। इससे साफ हो जाएगा कि मोदी सरकार ने किस तरह से उन्हें फर्जी मामलों में फंसाने की कोशिश की है। बकौल शर्मा, 'उन्हें इसलिए प्रताड़ित किया जा रहा है कि क्योंकि वह एक युवा महिला आर्किटेक्ट के साथ मोदी की कथित निकटता से वाकिफ थे।'

उन्होंने कोर्ट को आगे बताया कि वह जब कच्छ के जिलाधिकारी थे तो उन्होंने ही 2001 में एक कार्यक्रम के दौरान उक्त युवती का परिचय मोदी से कराया था। मोदी भूकंप से तबाह भुज शहर में हिल गार्डन का उद्घाटन करने आए थे और युवती वहां पर बतौर लैंडस्केपिंग आर्किटेक्ट कार्यरत थी।' उनके अनुसार, 'वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी कुलदीप शर्मा का भाई होने के नाते भी मोदी सरकार ने उन्हें काफी परेशान किया। उनके छोटे भाई कुलदीप ने गोधरा कांड के बाद भड़के दंगों में मोदी सरकार की कई कारगुजारियों को उजागर किया था।'

प्रदीप शर्मा का कोर्ट से कहना था, 'उनके द्वारा दाखिल अर्जी के साथ संलग्न दस्तावेजों और ऑडियो टेप के अनुवाद की प्रतिलिपि का अदालत संज्ञान लें। फिर इस आधार पर नरेंद्र मोदी, अमित शाह और अन्य सक्षम अधिकारियों के खिलाफ टेलीग्राफ अधिनियम 1885 के उल्लंघन की सीबीआइ जांच का आदेश जारी करे।' छह आपराधिक मामलों का सामना कर रहे 1984 बैच के आईएएस ने शीर्ष न्यायालय के समक्ष कहा कि जासूसी प्रकरण में सामने आए ऑडियो टेप इस बात के गवाह हैं कि राज्य सरकार उनके प्रति दुर्भावना से ग्रस्त है और किसी भी तरह उन्हें फंसाने की फिराक में है। आखिरी बार भावनगर नगर निगम के आयुक्त रहे शर्मा को 6 जनवरी, 2010 को गिरफ्तार किया गया था। उन पर कच्छ के भूकंप पीड़ितों के पुनर्वास कार्यक्रम में हेराफेरी करने का आरोप था।

मधु किश्वर को दी मानहानि की नोटिस

अहमदाबाद। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी समर्थक लेखिका मधु किश्वर को निलंबित आईएएस प्रदीप शर्मा ने मानहानि नोटिस भेजा है। साथ ही उन्होंने चेताया है कि अगर मधु ने उनकी नोटिस का सोमवार तक जवाब नहीं दिया तो वह लेखिका के खिलाफ अदालत में एक करोड़ रुपए का दावा करेंगे। मधु किश्वर ने युवती जासूसी प्रकरण में ट्वीट कर कहा है कि उक्त युवती से आईएएस का करीबी संबंध रहा है। भुज में कलेक्टर रहते शर्मा ने युवती को सरकारी मदद पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। शर्मा ने इस पर आपत्ति जताते हुए अपने वकील मुकुल सिंहा के जरिये मधु को मानहानि नोटिस भेजा है। गौरतलब है कि मधु किश्वर गुजरात के मुख्यमंत्री पर मोदीनामा नामक पुस्तक लिख चुकी हैं।

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