Gujarat: कोरोना वायरस के चलते देशभर में स्कूल पिछले 5 महीनों से बंद पड़े हैं, इसके बावजूद बच्चों के पेरेंट्स पर फीस का बोझ पड़ रहा है। इसे लेकर जब अभिभावकों ने विरोध किया तो गुजरात सरकार ने सभी निजी स्कूलों पर स्कूल खुलने तक ट्यूशन फीस लेने से रोका था। अब गुजरात हाई कोर्ट ने सरकार के आदेश दिया कि ऑनलाइन पढ़ाई करवा रहे स्कूल ट्यूशन फीस ले सकते हैं।

गुजरात हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस जेबी पारदिलवाला की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि बच्चों को शिक्षा मुहैया कराने और स्कूलों को चलाए रखने के लिए एक संतुलन की जरूरत है। ट्यूशन फीस लेने की अनुमति नहीं देने से कई छोटे स्कूल हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे, जबकि छात्रों को शिक्षा नहीं मिलने से लंबे समय में उनके समग्र और सामाजिक विकास पर असर पड़ेगा। इसलिए ऑनलाइन पढ़ाई करवा रहे स्कूल ट्यूशन फीस ले सकेंगे। अभिभावकों को यह एहसास होना चाहिए कि ऑनलाइन शिक्षा एक निरर्थक कवायद नहीं है। स्कूलों को भी इस बात से अवगत होना चाहिए कि अभिभावक आर्थिक अस्थिरता का सामना कर रहे हैं।

कोर्ट ने रद्द किया सरकार का 16 जुलाई का आदेश:

गुजरात सरकार ने 16 जुलाई को आदेश जारी किया था कि जब तक स्कूल चालू नहीं हो जाते, निजी स्कूल छात्रों के पेरेंट्स से ट्यूशन फीस नहीं वसूल सकेंगे। निजी स्कूलों द्वारा ऑनलाइन शिक्षा की पेशकश के बावजूद सरकार ने उन पर ट्यूशन फीस लेने से रोक लगा दी थी। इसके बाद स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई बंद कर दी गई थी। निजी स्कूलों के संघ ने सरकार के इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी और फैसला उनके पक्ष में आया।

Posted By: Kiran K Waikar

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