शत्रुघ्‍न शर्मा, अहमदाबाद। संत मोरारी बापू ने भगवान स्‍वामी नारायण के बारे में विवादास्पद बयान दिया है। हालांकि बाद में उन्होंने माफी मांग ली है लेकिन अपने बयान से उन्होंने देश व दुनिया के लाखों स्‍वामी नारायण भक्तों को नाराज कर दिया है।

स्‍वामीनारायण संप्रदाय के एक प्रमुख धडे बोचासणवासी अक्षर पुरुषोत्‍तम स्वामी बीएपीएस के आधा दर्जन से अधिक संतों ने मोरारी बापू के बयान की निंदा करते हुए कहा कि उन्‍हें भगवान नीलकंठ स्‍वरुप पर सवाल उठाने से पहले उनके जीवन के संबंध में जानकारी लेना चाहिए था। हजारों साल पुरानी संप्रदाय की हस्‍तलिखित प्रतियों में स्‍वामीनारायण भगवान की ओर से बचपन में हिमालय पर तप करने और भारत भ्रमण का उल्‍लेख है।

राधा रमण स्‍वामी ने कहा कि बापू के बयान से हजारों संत व लाखों श्रद्धालुओं की आस्‍था को ठेस पहुंची है। उन्‍हें सार्वजनिक रूप से इस मामले में माफी मांगनी चाहिए। बापू को स्‍वामीनारायण पर टिप्‍पणी करने से पहले विचार करना चाहिए था।

संत सत्‍यस्‍वरूप स्‍वामी ने कहा कि बापू को इस मामले में संभलकर बोलना चाहिए, स्‍वामीनारायण के नीलकंठ स्‍वरूप का खंडन करने से पहले अपनी वाणी पर काबू रखना चाहिए। संत विवेक स्‍वरुप व संत नित्‍यस्‍वरुप सवामी ने कहा कि बापू अपने बयान से समाज को गुमराह कर रहे हैं। रामकथा के दौरान स्‍वामीनारायण के नीलकंठ स्‍वरुप को नकारने के साथ उसे बनावटी बताकर बापू ने संप्रदाय की आस्‍था पर चोट की है।

गौरतलब है कि गत दिनों राजकोट में एक रामकथा के दौरान संत मोरारी बापू ने कहा था कि स्‍वामीनारायण भगवान के किशोर स्‍वरूप को नीलकंठवर्णी कहा जाता है, यह भ्रम फैलाने जैसा है। नीलकंठ तो वो होता है जो जहर पीता है, लाडू खाने वाला नीलकंठ नहीं हो सकता। हालांकि विवाद बढता देख मोरारी बापू ने संपूर्ण समाज को मिच्‍छामी दुक्‍कडम अर्थात गलती हो गई हो तो क्षमा कह चुके हैं। लेकिन बापू के इसी बयान को लेकर स्‍वामी नारायण संप्रदाय पूरी तरह उनसे नाराज है, वे अब उनके सार्वजनिक रूप से माफी की मांग कर रहे हैं।