वडोदरा (प्रे)। आखिरकार दो दशक बाद बड़ौदा के गायकवाड़ राजघराने की 20 हजार करोड़ की संपत्ति का विवाद सुलझ गया। छह माह से चल रही कोशिशों को अमलीजामा पहनाते हुए गायकवाड़ के वंशजों ने वडोदरा एडिशनल सिविल जज पीएच शर्मा की अदालत में बुधवार को सुलहनामे पर दस्तखत कर दिए। दोनों पक्षों ने सभी मुकदमें वापस लेने का फैसला किया है।

मुंबई में बस चुके शाही परिवार के वरिष्ठ सदस्य संग्राम सिंह गायकवाड़ और उनकी पत्नी आशा राजे, उनके पुत्र प्रताप सिंह राव गायकवाड़, बहू प्रज्ञाश्री ने अपने बड़े भाई स्वर्गीय रंजीत सिंह के बेटे समरजीत सिंह गायकवाड़ व उनकी बहनों से लक्ष्मी विलास पैलेस में मंगलवार को मुलाकात की।

सूत्रों का कहना है कि चाचा संग्राम सिंह और भतीजे समरजीत सिंह और उनकी पांच बहनों समेत संपत्ति के सभी 27 हिस्सेदारों ने करारनामे पर दस्तखत किए। सुलहनामे के अनुसार 20 हजार करोड़ की संपत्ति का बड़ा हिस्सा समरजीत सिंह को जाएगा। इसमें 700 एकड़ में फैले 120 साल पुराने भव्य लक्ष्मी विलास पैलेस के साथ मोती बाग की जमीनें शामिल हैं। इन जमीनों पर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मैचों के प्लेग्राउंड के साथ गोल्फ कोर्स भी है। अचल संपत्ति के अलावा समरजीत सिंह को राज घराने का सोना, गहने, हीरे और बेशकीमती पेंटिंग भी मिलेंगी।

मुंबई में बस चुके संग्राम सिंह गायकवाड़ को मांडवी स्थित नजरबाग पैलेस, इंदुमती पैलेस, अशोक बंगला और राजमहल रोड स्थित बाकुल बंगला मिलेगा। इसके अलावा उन्हें सूरत स्थित बड़ौदा रायन्स परिसर और मुंबई स्थित रीयल इस्टेट संपत्तियां भी मिलेंगी। गायकवाड़ परिवार की पांचों बहनों को भी परिवार की चल संपत्ति में हिस्सा मिलेगा। शाही घराने के अधीन 16 ट्रस्ट भी हैं। इसमें कुछ मंदिर, सोना, जेवर और बेशकीमती पेंटिंग भी आती हैं। ये सभी ट्रस्ट भी परिवार के बीच बटेंगे।

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