
लाइफस्टाइल डेस्क। मौजूदा समय में होटल लेकर घूमना, फिरना या स्टे करना आम बात है। लोग अपनी सुविधा और टाइमिंग के हिसाब से होटल में बुकिंग करके रहते हैं। हालांकि कई बार जब वह होटल पहुंचते हैं तो उन्हें पता चलता है कि उनका रूम पूरी तरह रेडी नहीं है। लोगों के लिए भी यह सुनना थोड़ा अटपटा होता है कि बुकिंग करने के बाद भी क्यों कमरा तैयार नहीं है। ऐसा क्यों होता है और होटल में चेक-इन का समय अकसर दोपहर 12 या 2 बजे ही क्यों होता है? आइए इन सवालों का जवाब जानते हैं।
इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह कमरे की साफ-सफाई और पूरी तरह तैयारी है। ज्यादातर मेहमान लोग 10 से 11 के बीच ही चेक आउट करते हैं। इसके बाद असली तैयारी शुरू होती है, जहां कमरे को पूरी तरह सैनिटाइज किया जाता है, बेडशीट बदली जाती हैं, बाथरूम की डीप क्लीनिंग होती है और तौलिए, साबुन, शैंपू जैसी चीजों की रीफिल की जाती हैं। ऐसे में जो भी बड़ा होटल होगा, वहां कमरों की संख्या ज्यादा होने की वजह से सफाई पूरी होने में समय भी ज्यादा लगेगा।
होटल में कमरों की सफाई में ज्यादा समय इसलिए लगता है क्योंकि यहां एक बड़े सिस्टम की तरह काम होता है, जहां हर विभाग को तालमेल से चलना पड़ता है। तय चेक-इन टाइम होने से फ्रंट-डेस्क, हाउसकीपिंग और मैनेजमेंट टीम के लिए काम की योजना बनाना आसान रहता है। फ्रंट-डेस्क को पता होता है कि गेस्ट कब सबसे ज्यादा आएंगे, हाउसकीपिंग अपने शेड्यूल के हिसाब से कमरे तैयार कर सकती है और सुपरवाइजर समय पर रूम इंस्पेक्शन कर सकते हैं। इससे कन्फ्यूजन कम होता है और हर मेहमान को एक समान गुणवत्ता वाली सेवा मिलती है।
अगर हर गेस्ट को अर्ली चेक-इन दे दिया जाए, तो पूरे दिन का शेड्यूल बिगड़ सकता है। हाउसकीपिंग पर एक साथ कई कमरों को तैयार करने का दबाव बढ़ जाएगा, जिससे सफाई और तैयारी की गुणवत्ता गिर सकती है। इसके परिणामस्वरूप गेस्ट को ऐसा कमरा मिल सकता है जो पूरी तरह तैयार न हो, और उनका अनुभव खराब हो सकता है। एक फिक्स्ड टाइमिंग होटल को व्यवस्थित तरीके से काम करने में मदद करती है।