शहीद खान जिनकी शहनाई व बैंड के धुन के मुरीद थे सभी

हृदय गति रुक जाने से हुआ निधन, वर्षों दी पुलिस में सेवाएं,राष्ट्रीय पर्व पर रहते थे आकर्षण का केंद्र ।

Updated: | Tue, 17 May 2022 12:16 AM (IST)

अंबिकापुर। सालों तक सरगुजा पुलिस बैंड के सरताज रहे शहीद खान नहीं रहे। सोमवार को हृदय गति रुक जाने से निधन हो गया। सरगुजा में हर कोई इन्हें इनकी कला से जानता था। राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर इनके नेतृत्व में पुलिस बैंड का धुन जब बजता था तो लोग गौरवांवित होते थे। शादी विवाह सहित अन्य समारोह में इनके समूह का बैंड हर आम और खास को पसंद आता था। तकिया मजार शरीफ में संदल, चादर पोशी के लिए निकलने वाला जुलूस हो या फिर श्री राम मंदिर से निकलने वाली शोभायात्रा, हर जगह शहीद खान की शहनाइयां गूंजती थीं। ओम जय जगदीश हरे ।की धुन हो या फिर भर दे झोली मेरी या मोहम्मद। के धुन से लोगों का दिल जीत लेते थे।

पुलिस विभाग में शासकीय सेवा के दौरान पुलिस बैंड पार्टी के वर्षों मुखिया रहे शहीद खाकी वर्दी में जब आकर्षक साज-सज्जा के साथ अपनी बैंड टोली लेकर निकलते थे तो हर शख्स इनका मुरीद हो जाता था।राष्ट्रीय पर्व में जब आकर्षक परेड की सलामी मुख्य अतिथि लेते थे तो आगे आगे चलने वाली इनकी बैंड की टुकड़ी पूरे माहौल को देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत करने में कोई कसर नहीं छोड़ती थी।अपनी कला के जरिए सरगुजा जिला ही नहीं बल्कि संभाग में अपनी पहचान बना चुके थे। राष्ट्रीय पर्व में ही नहीं, कई शासकीय, अशासकीय समारोहों में इनके बैंड की धुन और शहनाइयां गूंजती थी। कई पुरस्कार और सम्मान भी इन्हें मिला था। तीन वर्ष पूर्व शहीद खान सेवानिवृत्त हुए थे। नगर के मोमिमपुरा मोहल्ले में रहने वाले शहीद खान शहर में कई परिवारों से जुड़े थे। लोगों के घ्ार शादी, पार्टी में शहनाइयां बजाकर मेहमानों को अपनी ओर आकर्षित करने वाला यह शख्सियत सभी के दिलों में बसा था। सरगुजा की पहचान बैंड के माध्यम से इन्होंने दी थी। लोग अपनी शादियों में इन्हें ही बुलाना पसंद करते थे।

एम. दरबार बैंड पार्टी बनाकर इन्होंने अच्छी खासी लोकप्रियता हासिल की थी। उनके निधन से शहर के लोग व उनके चाहने वाले स्तब्ध हैं। कई लोगों ने इनके सानिध्य में संगीत की शिक्षा भी ग्रहण की थी। इंटरनेट मीडिया पर लोग जिस तरह इन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि पुरानी तस्वीरों और वीडियो के साथ जारी कर रहे हैं। इसी से इनकी लोकप्रियता का अनुमान लगाया जा सकता है। मुंबई में संगीत की दुनिया में स्थान बना चुके अंबिकापुर के कलाकार लक्ष्मण सिन्हा लखन लिखते हैं कि बचपन में इन्हीं से संगीत की बारीकियां सीखने को मिली। इनके सानिध्य में कई जगह कार्यक्रम देने का मौका मिला जो हमेशा अविस्मरणीय रहेगा। नगर के वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट विजय जायसवाल ने तो बेहद ही भावपूर्ण अंदाज में इंटरनेट मीडिया पर शहीद खान को श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने लिखा है शहीद भाई जिनको हम परवाज भारती के नाम से भी जानते थे।

ये मेरे बचपन के मित्र थे। बचपन में मोहल्ले में गणेश पूजा, दुर्गा पूजा के अवसर पर स्टेज परफार्म किया करते थे। उस जमाने में शादी,विवाह में क्लेरिनेट बजाने का प्रचलन नहीं था। उन्हें मैंने अपनी खुद की शादी में जब अनुरोध किया तो वे बेहद संकोच में आ गए किंतु मेरा अनुरोध टाल न सके। फिर जो उन्होंने परफार्म किया उसकी बानगी देखते ही बनी।

बैंक डकैती कांड के आरोपित को पकड़ा था-

अंबिकापुर शहर में दो दशक पूर्व बीच शहर के देवीगंज रोड में बड़ौदा बैंक डकैती कांड के आरोपितों को पुलिस विभाग में रहते शहीद खान ने पकड़ने का साहस दिखाया था। इसे बताते हुए चार्टर्ड अकाउंटेंट विजय जायसवाल ने लिखा है वे संगीत प्रेमी एवं कलाकार तो थे ही एक बहादुर इंसान भी थे। बैंक आफ बड़ौदा डकैती कांड में वे अपनी जान पर खेलकर डकैतों का पीछा किए और उन्हें पकड़ा। उन्हें पुरस्कार एवं प्रमोशन भी मिला था। यारों के यार और गीत-संगीत, कव्वाली, भजन के जादूगर, जिंदादिल बहादुर इंसान थे।

Posted By: Yogeshwar Sharma
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