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Bilaspur News: बातों-बातों में: बंद हो बंद की राजनीति

Updated: | Sun, 28 Feb 2021 06:20 AM (IST)

डा सुनील गुप्‍ता। Bilaspur News: कोरोना संक्रमण के कारण उद्योग व व्यापार जगत अभी भी पूरी तरह पटरी पर नहीं आ पाया है। आर्थिक तंगी से व्यवसायी उबर नहीं पा रहे हैं। सरकार भी अपने स्तर पर तमाम कोशिशें कर रही है। इसी बीच कैट (कंफेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स) ने अपनी मांगों को लेकर शुक्रवार को देशव्यापी बाजार बंद का आह्वान किया। हमारे अंचल की बात करें तो इसे बहुत ज्यादा सफलता नहीं मिली। बाजार की स्थिति को देखते हुए कैट का बंद कितना उचित और कितना अनुचित है यह तो बहस का विषय है पर अधिकांश व्यवसायियों को जीएसटी के विरोध के लिए बंद की राजनीति रास नहीं आई। लाकडाउन का वह भयावह दौर आज भी सब के जेहन में कैद है। कारोबार ठप हो गया था। राष्ट्रव्यापी संकट से उबर रहे व्यापार और उद्योग जगत को विरोध के बहाने कहां ले जाने का प्रयास है, अब इसे लेकर चर्चा हो रही है।

शिवांश की मुस्कान शुभ संदेश

आमतौर पर यह देखने में आता है कि किसी घटना की सूचना के बाद भी पुलिस देर से पहुंचती है। यही वजह है कि अपराधी घटना को अंजाम देकर भाग निकलते हैं। हाल ही में खरसिया के एक व्यवसायी के बच्चे के अपहरण के मामले में पुलिस की एक अलग तस्वीर नजर आई। तत्परता इस बार काबिले तारीफ थी। शिवांश का उन्हीं के घर के रसोइए ने अपहरण कर लिया। चंद घंटे मेें ही खबर पूरे अंचल में फैल गई। सवाल मासूम की सलामती का था। पुलिस के भी हाथ-पैर कांप गए। रायगढ़ से लेकर न्यायधानी तक पुलिस महकमा अलर्ट हो गया। अपने जिले से लेकर पड़ोसी राज्य तक जाल बिछाया और चंद घंटे के अंदर ही मासूम को अपहर्ताओं के चंगुल से बचा लिया। इससे एक बड़ी अनहोनी टल गई। जनता के बीच न केवल एक अच्छा संदेश गया बल्कि पुलिस मित्र की धुंधली तस्वीर भी चमकदार हुई है।

जगी थी शिक्षाविदों की आस

स्व. नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय में कुलपति के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एलपी पटेरिया की नियुक्ति का आदेश राजभवन से जारी होते ही यहां के शिक्षाविदों में खुशी की लहर दौड़ गई थी। इसे संयोग ही कहें कि इसी बीच काफी दिनों से खाली अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो गई। छत्तीसगढ़िया शिक्षाविदांे के मन में उम्मीद जगी थी कि अब अच्छे दिन आएंगे। यही कारण है कि दौड़ में 84 से ज्यादा शिक्षाविद शामिल हो गए। ये अलग बात है कि अवसर नहीं मिल पाया। दौड़ में पीछे रह गए। अच्छी बात ये रही कि छत्तीसगढ़िया शिक्षाविदों की बड़ी टोली तैयार हो गई है। यह उम्मीद कर सकते हैं कि देश और राज्य की बेहतरी के लिए आने वाले दिनों में शिक्षा के साथ ही दूसरे क्षेत्रों में बेहतर योगदान मिल सकेगा। तभी तो नए साहब भी छत्तीसगढ़िया रंग में रंगने लगे हैं।

प्रकृति प्रेम या कुछ और

पांच जिले वाले सरगुजा पुलिस रेंज में पुलिस महानिरीक्षक का प्रकृति प्रेम देखते ही बनता है। इसमें भी जशपुर प्रेम की बात ही अलग है। बचपन की पुरानी यादें साहब को यहां हर छोटे-बड़े आयोजन में खींच ले जाती हैं। अपनी माटी की खुशबू ही ऐसी है कि भुलाए नहीं भूलती। जब-जब अवसर मिलता है माटी का वंदन करने पहुंच जाते हैं। तभी तो मेले-ठेले में अपनेपन का भाव नजर आ ही जाता है। साहब के 'जतरा" मेले के उद्घाटन के अवसर पर जाने की चर्चा है। बड़ा आयोजन है। बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटती है। पुरानी संस्कृति को भी नजदीक से जानने और मेल मिलाप बढ़ाने के लिए इससे अच्छा मौका नहीं मिलता है। नेता तो ऐसे ही आयोजनों पर नजरें जमाए रखते हैं। लेकिन, जब आयोजकों को नेता नहीं अफसर पसंद हो तो भविष्य की संभावनाएं तलाशने ऐसे आयोजनों से नजदीकियां तो फायदेमंद ही है न।

Posted By: Yogeshwar Sharma
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