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Bilaspur News: सात सदस्यीय टीम तय करेगी बाघिन और जंगल का रिश्ता

Updated: | Thu, 24 Jun 2021 11:00 AM (IST)

शिव सोनी/बिलासपुर।Bilaspur News: अचानकमार टाइगर रिजर्व से लाई गई घायल बाघिन धीरे-धीरे स्वस्थ होने लगी है। इसे देखते हुए नियमित अवलोकन के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सात सदस्यीय टीम का गठन किया गया है।

इसमें मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी, वनमंडलाधिकारी व टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर, डब्ल्यूआइआइ (भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून), डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (विश्व प्रकृति निधि भारत) व नेचर क्लब के प्रतिनिधि, अचानकमार गांव के सरपंच और पशु चिकित्सक शामिल हैं। यही टीम तय करेगी कि बाघिन को जंगल में छोड़ना है या चिड़ियाघर में रखना है।

यह बाघिन टाइगर रिजर्व के छपरवा रेंज में घायल मिली थी। पीठ व पैर में घाव थे। हालत बेहद नाजुक होने के कारण उपचार के लिए 15 दिन पहले कानन पेंडारी जू लाया गया। यहां तीन पशु चिकित्सकों की टीम ने इलाज शुरू किया। समय पर चिकित्सीय सुविधा मिलने के कारण बाघिन की जान बच गई। अब वह धीरे-धीरे ठीक होने लगी है। इसे देखते हुए ही बाघिन को छोटे पिंजरे से निकालकर बड़े पिंजरे में रखा गया है।

पिंजरे को चारों तरफ से ढंका गया है, ताकि बाघिन किसी को न देख सके और शांति से स्वास्थ्य लाभ ले। पर अब तक यह तय नहीं हुआ है कि उसे जू में रखना है या वापस जंगल में छोड़ना है। यही निर्णय लेने के लिए सात सदस्यीय टीम बनाई गई है। प्राधिकरण की गाइड-लाइन भी है।

जब कभी जंगल से बाघ रेस्क्यू कर जू लाया जाता है, तब इस तरह की कमेटी बनाई जाए। टीम में प्राधिकरण ने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के उपेंद्र दुबे को अपना प्रतिनिधि बनाया है। टीम बीच-बीच में जू पहुंचकर बाघिन के स्वास्थ्य को लेकर अवलोकन करेगी। इस दौरान आहार मात्रा भी देखा जाएगा। पशु चिकित्सकों की टीम द्वारा जब स्वस्थ होने की रिपोर्ट दी जाएगी। उसके बाद टीम एक बैठक करेगी।

इसमें सर्वसम्मति से तय होगा कि उसे जंगल में छोड़ना है या नहीं। हालांकि अभी प्राथमिकता जंगल छोड़ने को दिया जा रहा है। इसीलिए उसे मनुष्यों से दूर रखा गया है। तीनों चिकित्सकों के अलावा केवल एक जूकीपर को उसके पास जाने की अनुमति है।

सात सदस्यीय टीम केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के दिशा-निर्देश पर बनाई गई है। टीम के सदस्यों ने अवलोकन शुरू भी कर दिया है। जल्द ही यह भी तय हो जाएगा कि बाघिन कोे जंगल छोड़ना है या कानन पेंडारी जू में ही रखना है।

सत्यदेव शर्मा

डिप्टी डायरेक्टर, अचानकमार टाइगर रिजर्व

Posted By: anil.kurrey
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