Bilaspur Radhakishan Sharma Column: कैंडल मार्च और बेरीकेडिंग राजनीति, पत्थलगांव की घटना के बाद राजनीतिक दल सक्रिय

Updated: | Sat, 23 Oct 2021 06:20 AM (IST)

Bilaspur Radhakishan Sharma Column: राधाकिशन शर्मा, बिलासपुर नईदुनिया। पत्थलगांव की घटना प्रदेश की राजनीति के लिए शर्मसार करने वाली घटना रही। गांजे के नशे ने एक युवक की जान ले ली। चार के हाथ पैर टूट गए। तब हाहाकार की स्थिति बनी थी। दूसरे दिन तनाव ऐसा कि पत्थलगांव की सड़कों पर लोग चलने से कतरा रहे थे। पुलिस की बूटों की आवाज गूंज रही थी। चप्पे-चप्पे पर पुलिस। डरी और सहमी हुई। कारण भी साफ था। शहरवासियों का गुस्सा उबाल मार रहा था।

कब क्या हो जाए और कौन क्या कर डाले ऐसी स्थिति थी। दूसरे दिन भाजपाइयों ने विरोध में कैंडल मार्च निकाला। शास्त्री स्कूल परिसर से दिग्गज भाजपा नेता व कार्यकर्ता हाथ में कैंडल जलाए चल रहे थे। कुछ ही कदम चले होंगे कि पुलिस ने रास्ता रोक लिया। सड़कों पर बेरीकेडिंग कर दी। शांतिपूर्ण मार्च के रास्ते रोड़े। पूरी रात और दूसरे दिन यही चर्चा कि आखिर डर किस बात का। रास्तो क्यों रोका।

दो दशक का टूटा नाता: कानन पेंडारी जू कभी बिलासपुर वन मंडल का अहम हिस्सा हुआ करता था। वन मंडल के नक्शे में यह सितारे की तरह दमक रहा था। चिड़िया घर में वन्यप्राणियों की मौत का सिलसिला क्या शुरू हुआ वन विभाग के सबसे बड़े अफसर तो अपने एसी चेंबर में ही थरथर कांपने लग जाते थे। कारण भी उनको अच्छी तरह पता था। तभी तो वातानुकूलित चेंबर होने के बाद पसीना से तरबतर हो जाया करते थे।

चिड़िया घर की देखरेख करने वाले प्रभारी अधिकारी अपने रिटायरमेंट से ठीक एक दिन पहले निलंबित जो हो गए थे। कारण था वन्यप्राणियों की मौत। निलंबन की पीड़ा झेलते हुए रिटायर हो गए थे। वन अफसर को वन्यप्राणियों से ज्यादा अपने सीआर की चिंता खाए जा रही है। तभी तो चिड़िया घर को डीएफओ कार्यालय के नक्शे से हटाकर बायोस्फियर के हवाले कर दिया है। अब जो होगा उसके लिए बायोस्फियर विभाग के अफसर जिम्मेदार होंगे।

अब आई सड़कों की याद: नवरात्र निकल गया। नगर निगम और पीडब्ल्यूडी के अफसरों को सड़कों की मरम्मत की याद नहीं आई। दुर्गा पंडालों में विराजी मां दुर्गा के दर्शन के लिए शहरवासी गड्ढों वाली सड़कों पर हिचकोले खाते एक से दूसरे मोहल्ले घुमते रहे। धूल भी खाते रहे। वाह रे निगम और लोक निर्माण विभाग के अफसर। नवरात्र में पूरे नौ दिन गहरी नींद में सोने वाले अफसरों की कुंभकर्णी निद्रा अब जाकर टूटी है।

शहर की सड़कों को अब चकाचक कर रहे हैं। कहीं गड्ढे भरते तो कहीं की उखड़ी सड़कों को दुस्र्स्त करते नजर आ रहे हैं। शहरवासी भी दोनों विभाग के अधिकारियों को कोस रहे हैं। सड़क बनाने वाले अफसरों की बात ही निराली है। हाई कोर्ट के आदेश की परवाह नहीं करते, ये तो जनता है। इनकी क्या सुनेंगे। लेकिन जनता भी पांच साल में एक बार सुनाती है। जब ऐसा होता है, अच्छे अच्छों की सत्ता खिसक जाती है।

अपनों पर नहीं रहा भरोसा: पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती कीमत का असर अब चौतरफा पड़ने लगा है। थोक सब्जी मंडी तिफरा में देश के अलग-अलग प्रांतों से हरी सब्जियां आ रही हंै। डीजल महंगा है, इसलिए भाड़ा भी दोगुना से ज्यादा हो गया है। दोगुना भाड़ा का मतलब सब्जी के दाम अपने आप तेज हो गए। मध्यमवर्गीय परिवार की रसोई की हरियाली छिन गई है। सब्जियां गायब हो गईं। आलू और प्याज आम आदमी की जेब की पहुंच से दूर हो गए हंै।

ऐसे में कांग्रेसजनों ने सब्जी बाजार पहुंचकर आंदोलन किया। हाथ में थैले लिए दिग्गज कांग्रेस एक से दूसरे दुकान घुमते रहे और हाय-हाय करते रहे। दिग्गज अपने मन से नहीं पीसीसी के फरमान के बाद ऐसी सियासी नौटंकी करते नजर आए। दरअसल पीसीसी ने ऐसा करने एक दिन पहले निर्देश जारी किए थे। सब्जी बाजार पहुंचकर आंदोलन करने और सेल्फी लेकर फोटो अपलोड करने हिदायत दी थी। पीसीसी ने ऐसा क्यों कहा।

Posted By: Yogeshwar Sharma