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Chhattisgarh Paddy Procurement : उपार्जन केंद्रों में उमड़ रही किसानों की भीड़, कोरोना दिशा- निर्देश का नहीं हो रहा पालन

Updated: | Wed, 02 Dec 2020 11:01 AM (IST)

बिलासपुर। Chhattisgarh Paddy Procurement : राज्य शासन के निर्देश पर जिले के सभी पंजीकृत धान खरीदी केंद्रों में 1 दिसम्बर से समर्थन मूल्य पर किसानों से धान खरीदी की जा रही है, मगर जिला प्रशासन व संस्था प्रबंधकों की उदासीनता के चलते समर्थन मूल्य पर धान बेचने पहुचे किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शासन के निर्देशानुसार सभी केंद्रों में 27 नवम्बर से किसानों को टोकन जारी किया जाना था, मगर खरीदी केंद्रों में 1 दिसम्बर से टोकन जारी किया जा रहा है। साथ ही यहां अव्यवस्था के चलते टोकन लेने फिजिकल डिस्टेंसिग की धज्जियां उड़ाते हुए भीड़ उमड़ रही है। इससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ने लगा है।

प्रदेश सरकार द्वारा जिले के पंजीकृत 195 सेवा सहकारी समितियों के 230 धान उपार्जन केंद्रों के माध्यम से समर्थन मूल्य पर 1 दिसंबर से धान खरीदा जा रहा है। धान बेचने वाले किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया जिले में सितंबर महीने से प्रारंभ हुई थी। पंजीयन की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर तय की गई थी, लेकिन सरकार ने पंजीयन की तिथि को एक सप्ताह के लिए बढ़ाते हुए 7 नवंबर तक कर दिया था। सरकार द्वारा किसानों को बोनस देने और धान का समर्थन मूल्य 1750 से बढ़ाकर 2500 रुपये किए जाने के बाद जिले में धान बेचने वाले किसानों की संख्या में बढ़ोतरी हो गई है। हालांकि जिले के अधिकांश क्षेत्रों में फसल की कटाई व मिजाई का कार्य पूर्ण को चुका है और किसान बेसब्री से समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए खरीदी केंद्र के खुलने का इंतजार कर रहे थे मगर धान खरीदी के अधिकतर केंद्र प्रभारी एवं कम्प्यूटर आपरेटरों का 27 नवम्बर को ट्रांसफर कर दिया गया। 28 नवम्बर को इन लोग बैठक में चले गए।

29 और 30 नवम्बर को अवकाश होने के कारण इन लोग प्रभार नही लिये।जबकि शासन द्वारा 27 नवम्बर से टोकन काटने का आदेश दे दिया गया था, लेकिन धान खरीदी के पहला दिन 1 दिसंबर को केंद्र प्रभारी और आपरेटर प्रभार लेकर किसानों का टोकन काटा गया। जिन किसानों का टोकन कट गया गया है वो बुधवार को खरीदी केंद्र धान को लायेगें। किसानों का अधिकतर धान कटाई मिसाई करके सोसाइटी खुलने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन जो सोसाइटी के प्रभारी और आपरेटर को बदल दिए गए हैं। वहां पर किसानों को भटकना पड़ा।

खरीदी के पहला दिन किसान सिर्फ टोकन कटवाने आए। वहीं अब किसानों की भीड़ टोकन लेने व समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए खरीदी केंद्रों में उमड़ रही है, मगर पर्याप्त व्यवस्था के अभाव में किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां काउंटर के अभाव में टोकन लेने के लिए फिजिकल डिस्टेंसिग की धज्जियां उड़ाते हुए काउंटर पर किसानों की भीड़ जुट रही है। यहां संस्था प्रबंधक द्वारा न तो सेनेटाइजर की व्यवस्था की जा रही और न ही कोरोना गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है, इससे संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ने लगा है। इस संबंध में जिला नोडल अधिकारी अश्वनी पांडेय का कहना है कि सभी प्रबंधक एवं ऑपरेटरों को निर्देशित कर धान खरीदी व्यवस्था बनाने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।

बढ़ गए 19 हजार किसान

पिछले वर्ष 2 लाख 19 हजार 521 हेक्टेयर धान का रकबा था जो इस साल घटकर वर्तमान में 2 लाख 16 हजार 515 हेक्टेयर पर आ पहुंचा है। इस साल 3 हजार धान का रकबा कम हो गया है। पिछले वर्ष 206 धान उपार्जन केंद्रों के माध्यम से 1 लाख 69 हजार 54 किसानों ने समर्थन मूल्य पर धान बेचा था। इस बीच कुल पंजीकृत किसानों की संख्या 1 लाख 73 हजार थे। जिनमें से 4 हजार किसानों ने धान नहीं बेचा जिनका पंजीयन इस साल निरस्त कर दिया गया है। इस साल 19 हजार 435 नए किसानों ने समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए अपना पंजीयन कराया है। पिछले साल जहां कुल पंजीकृत किसानों की संख्या एक लाख 73 हजार थी, वह इस साल बढ़कर अब एक लाख 88 हजार 77 तक पहुंच गई है।

Posted By: Himanshu Sharma
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