Covid 19 RTPCR Test: बिलासपुर सिम्स की वायरोलाजी लैब में कम हुई कोरोना जांच, एक हजार से सीधे 200 में पहुंचा

Updated: | Thu, 16 Sep 2021 04:40 PM (IST)

बिलासपुर। Covid 19 RTPCR Test: सिम्स (छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान) की वायरोलाजी लैब में कार्यरत कर्मियों की संविदा अवधि न बढ़ाने का खामियाजा कोरोना निपटान पर पड़ने लगा है। कर्मियों के काम बंद करने से अब रोजाना लगभग 200 सैंपल की जांच हो रहा पा रही है। इससे पहले रोजाना लैब में एक हजार आरटीपीसीआर सैंपल की जांच हो रही थी।

सिम्स के माइक्रोबायोलाजी विभाग में कार्यरत टेक्नीशियन, लैब टेक्नीशियन, लैब अटेंडर और सफाई कर्मचारियों की बीते 14 सितंबर को संविदा अवधि खत्म हो गई है। समय से पहले इनके संविदा अवधि को बढ़ाने की पहल नहीं की गई थी। ऐसे में 21 संविदा कर्मियों की सेवा समाप्त हो गई है। मौजूदा स्थिति में सिर्फ दो संविदा कर्मी बचे हैं, जिनका अनुबंध आने वाले माह में खत्म हो जाएगा। ऐसे में वायरोलाजी लैब के संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अतिरिक्त रूप से दो टेक्नीशियन दिए गए हैं। इस तरह मौजूदा स्थिति में कुल चार कर्मचारी लैब का काम संभाल रहे हैं। इसका सीधा असर कोरोना निपटान पर पड़ रहा है, क्योंकि पहले रोजाना एक आरटीपीसीआर सैंपल की जांच कर रिपोर्ट दी जा रही थी। वहीं अब रोजाना सिर्फ 200 सैंपल की रिपोर्ट दी जा रही है।

एक सप्ताह के भीतर बढ़ेगी संविदा अवधि

सिम्स प्रबंधन का कहना है कि संविदा कर्मचारियों की सेवा अवधि समाप्त होने की जानकारी शासन को दी गई है। साथ ही बताया गया है कि इससे वायरोलाजी लैब का काम प्रभावित हो गया है। ऐसे में शासन स्तर पर कहा गया है कि एक सप्ताह के भीतर निर्णय लेकर कर्मचारियों की संविदा अवधि बढ़ाई जाएगी। ऐसे में अभी कर्मचारी काम पर नहीं आ रहे हैं।

400 सैंपल पेंडिंग

दो दिन के भीतर वायरोलाजी लैब में 400 सैंपल की रिपोर्ट पेंडिंग में आ गई है। मौजूदा स्थिति में तत्काल वाले सैंपलों की रिपोर्ट दी जा रही है। ऐसे में मुंगेली, गौरेला-पेंड्रा, मरवाही से भेजे जाने वाले आरटीपीसीआर सैंपल की समय पर जांच नहीं हो पा रही है। आने वाले दिनों में पेंडेंसी और भी बढ़ने की आशंका है।

वायरोलाजी लैब में संविदा कर्मचारी की सेवा अवधि समाप्त हो गई है। शासन को जानकारी दी गई है। एक सप्ताह के भीतर इन कर्मचारियों की संविदा अवधि बढ़ाई जाएगी। कर्मचारियों के काम न करने से कुछ हद तक काम प्रभावित हुआ है।

डा. आरती पांडेय, पीआरओ, सिम्स

Posted By: sandeep.yadav