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Bilaspur News: लालबत्ती की ओर लगी नजरें, संपर्क सूत्राें से साध रहे संपर्क

Updated: | Fri, 25 Jun 2021 03:46 PM (IST)

बिलासपुर। Bilaspur News: निगम मंडल में ताजपोशी को लेकर एक बार फिर अटकलबाजी का दौर शुरू हो गया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव व प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया के दो दिनी छत्तीसगढ़ प्रवास के बाद दिल्ली लौटते ही एक बार फिर चर्चा होने लगी है। जिले के किन-किन दिग्गज नेताओं का भाग्य पहली किस्त में खुलेगा इसे लेकर भी अटकलें लगाई जा रही है। दौड़ में शामिल दिग्गज संपर्क सूत्रा से लगातार संपर्क साध रहे हैं साथ ही उनके संपर्क में अब भी बने हुए हैं।

कांग्रेस की सरकार को राज्य की सत्ता पर काबिज हुए ढाई साल हो गया है। निगम मंडल में महत्वपूर्ण पदों पर काबिज होने का सपना संजोये दिग्गज कांग्रेसी नेता अब भी बैठे हुए हैं और रायपुर व दिल्ली की ओर टकटकी लगाए हुए हैं। कुर्सी दौड़ में शामिल और कतार में खड़े नेताओं व दावेदारों का सब्र भी जवाब देने लगा है। ढाई साल का समय गुजर गया है। कामकाज के लिए अब डेढ़ वर्ष का ही वक्त रह गया है। पांचवा साल तो चुनावी तैयारियों और रणनीति बनाने में गुजर जाता है। जाहिर है दावेदारों की छटपटाहट भी बढ़ने लगी है।

छटपटाहट के बीच भीतर ही भीतर गुस्सा भी फूटने लगा है। रणनीतिकारों की परेशानी ये कि निगम मंडल में जितनी कुर्सियां है दावेदारों की संख्या उससे कहीं अधिक है। जाहिर सी बात है 15 वर्ष तक वनवास भोगने के बाद राज्य की सत्ता पर दो तिहाई से अधिक बहुमत के साथ काबिज कांग्रेस के छोटे से लेकर बड़े नेताओं को सरकार और पार्टी से अपेक्षा भी बढ़ गई है।

प्रदेश प्रभारी पुनिया के दिल्ली वापसी के बाद से अटकलबाजी तेज हो गई है। बीते दो दिनों से चर्चा का बाजार सरगर्म है। सत्ता से जुड़े कांग्रेसी दिग्गजों का तो यहां तक कहना है कि पहली किस्त जल्द जारी हो जाएगी। उनके दावों पर गौर करें तो मुख्यमंत्री के करीबी एक या फिर दो नेताओं की पहली किस्त में ही ताजपोशी हो सकती है।

नामाें को लेकर चर्चा का दौर

सत्ता के करीबी किन नेताओं को पहली किस्त में निगम मंडल की कुर्सी मिलेगी इसे लेकर बीते दो दिनों से चर्चा कुछ ज्यादा ही छिड़ी हुई है। अचरज की बात ये कि विपक्षी नेता भी इसमें स्र्चि लेते दिखाई दे रहे हैं। जाहिर सी बात है कि शहर से जिन दिग्गजों की निगम मंडल में ताजपोशी होगी उसके तुरंत बाद जिला व शहर की राजनीतिक परिस्थितियां भी उसी अंदाज में करवट लेंगी। इन्हीं सब कारणों को देखते हुए विपक्षी दल के रणनीतिकार भी दिलचस्प ले रहे हैं। सत्ताधारी दल में गुटीय संघर्ष जितना तेज होगी विपक्ष को उतना ही फायदा होगा।

Posted By: sandeep.yadav
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