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Bilaspur News: अन्न्दाता किसानों के रकबे में चली कटौती की सरकारी कैंची

Updated: | Thu, 03 Dec 2020 12:43 PM (IST)

बिलासपुर। Bilaspur News: समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसान इस बार भी अपने आपको ठगा महसूस करने लगे हैं। पंजीयन कराते वक्त राजस्व अमले ने पूरे रकबे का पंजीयन किया था। धान बेचने जब खरीदी केंद्र पहुंच रहे हैं तब पता चल रहा है कि रकबा में कटौती कर दी गई है। अन्न्दाता किसानों का गुस्सा अब फूटने लगा है।

सरकारी दावों और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अधिकारियों के दावों से उलट समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों के रकबे में बीते वर्ष की तरह इस बार भी राज्य शासन ने कटौती की कैंची चला दी है। धान के रकबे में कटौती के इस खेल ने किसानों की परेशानी एक बार फिर बढ़ा दी है।

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अंतर्गत आने वाले सभी 124 खरीदी केंद्रों में कमोबेश कुछ इसी तरह की शिकायत मिल रही है। समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों ने जितने एकड़ में धान की फसल ली है उसका पंजीयन कराया है। पटवारी ने धान फसल वाले रकबा के आधार पर किसानों का पंजीयन किया है। पंजीयन के बाद तहसीलदार ने सत्यापन कर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक को किसानों की सूची बनाने डाटा भेज दिया था।

इसी आधार पर किसानों की सूची धान फसल वाले रकबा के आधार पर तैयार कर रायपुर भेजा गया था। एक आला अफसर की मानंे तो किसानों के धान फसल वाले रकबे में राजधानी स्तर पर कटौती की गई है। धान बेचने के लिए किसान जब खरीदी केंद्र पहुंच रहे हैं और केंद्र में उनके नाम के आगे रकबा के आधार पर जब धान खरीदी की जा रही है तब यह जानकारी मिल रही है कि पंजीयन में रकबे की कमी कर दी गई है।

रकबा कटौती में बड़े व सीमांत किसानों को टारगेट में रखा गया है। 50 एकड़ वाले किसानों का 10 से 12 एकड़,100 एकड़ वाले किसानों का 25 से 30 एकड़ रकबा कम कर दिया गया है। जाहिर है इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा। दूसरी तरफ ऐसा कर सरकार फायदे में रहेगी। एक बड़े रकबे का धान खरीदने से बच जाएगी व समर्थन मूल्य भी कम देना पड़ेगा।

गिरदावरी के दौरान बरती गई थी चौकसी

पंजीयन से पहले राज्य शासन ने प्रदेशभर के कलेक्टरों को एक आदेश जारी कर धान फसल वाले रकबे का मौके पर जाकर राजस्व अमले को गिरदावरी करने की हिदायत दी थी। गिरदावरी के दौरान मैदानी अमले को यह देखना था कि पंजीयन के लिए किसानों ने जितना रकबा का उल्लेख किया है वास्तव में उतने एकड़ मंे किसानों ने धान का फसल लिया है या नहीं। मैदानी अमले को मौके पर ही धान फसल वाले रकबे का डाटा भरना था।

बीते वर्ष कराया था रकबा सरेंडर

राज्य शासन ने बीते वर्ष समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के दौरान जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के माध्यम से खरीदी केंद्रों में आवेदन पत्र का नमूना भेजकर किसानों से सहमति लेने का आदेश जारी किया था। सहमति पत्र में किसानों को रकबा सरेंडर करने के संंबंध में अपनी सहमति देते हुए हस्ताक्षर करना था।

इन किसानों का घट गया रकबा

ग्राम लोहर्सी के किसान सुरेंद्र तिवारी के पंजीयन से पांच एकड़ 55 डिसमील,किरारी के किसान विष्णु प्रसाद का दो एकड़ 35 डिसमील,सेलर के किसान घुरऊ राम का एक एकड़ आठ डिसमील,रघुवीर सिंह का तीन एकड़ 45 डिसमील रकबा पंजीयन से अलग कर दिया गया है।

Posted By: anil.kurrey
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