छत्तीसगढ़ में प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के चुनाव पर हाई कोर्ट की रोक

Updated: | Mon, 06 Dec 2021 08:49 PM (IST)

बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। हाई कोर्ट ने प्रदेश की प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के चुनाव पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने राज्य शासन को जवाब देने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की है। कांग्रेस शासन के आते ही सहकारी समितियों को भंग कर दिया गया और पुनर्गठन की योजना लागू की। इसमें कहा गया कि अब सारे अधिकार पंजीयक सोसायटी के पास आ जाएंगे। इस मामले में समितियों द्वारा पेश याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की युगलपीठ ने इसे निरस्त कर दिया था।

कार्यकाल पूरा करने देने के भी साफ निर्देश दिए गए थे। इसके बाद दोबारा सरकार ने योजना लाई और कोरम का अभाव बताकर समितियों को फिर भंग कर दिया। इसके खिलाफ महासमुंद के प्रेमप्रकाश गुप्ता व अन्य ने हाई कोर्ट में चुनौती दी। इसे हाईकोर्ट ने 2020 में सुनवाई के लिए मंजूर कर लिया। इस याचिका के विचाराधीन रहने के दौरान राज्य सहकारी चुनाव आयोग ने सहकारी समितियों के लिए चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया और चुनाव की तिथि चार दिसंबर 2021 निर्धारित कर दी।

इसे पुन: हाई कोर्ट में अधिवक्ता वरुण शर्मा व अन्य वकीलों के माध्यम से चुनौती दी गई और चुनाव निर्धारित करने को गलत बताते हुए चुनाव पर रोक लगाने की मांग की गई। याचिका में कहा गया कि इस तरह चुनाव का आयोजन निश्चित रूप से नियमों का उल्लंघन होगा। यह याचिकाकर्ताओं के अधिकार और उनके हितों के खिलाफ होगा। याचिका में ऐसे मामलों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी उल्लेख किया गया।

राज्य सरकार के वकील ने चुनाव पर रोक के आवेदन का विरोध किया और तर्क प्रस्तुत किया कि 2019 की योजना के अनुसार समितियों का पुनर्गठन पहले ही हो चुका है। इसलिए चुनाव कराना आवश्यक है। कोर्ट ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं को सुना।

युगलपीठ द्वारा पहले दिए गए निर्देश के आधार पर याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों पर राज्य शासन को उत्तर दाखिल करने के लिए समय देते हुए जस्टिस आरसीएस सामंत ने आदेश दिया कि प्रतिवादी प्राधिकारियों द्वारा अधिसूचित चुनाव प्रक्रिया सुनवाई की अगली तिथि तक स्थगित रहेगी। मामले की सुनवाई चार सप्ताह के बाद तय की गई है।

Posted By: anil.kurrey