हाई कोर्ट ने जाति प्रमाण पत्र निरस्त करने के आधार पर करवाई में रोक लगाई

Updated: | Sat, 04 Dec 2021 02:20 PM (IST)

बिलासपुर। हाई कोर्ट ने जाति प्रमाण पत्र निरस्त किये जाने के खिलाफ पेश याचिका में याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी प्रकार के करवाई पर रोक लगाई है। याचिकाकर्ता राजेश लिविंग स्टोन की 1990 में सामान्य प्रशासन विभाग में नियुक्ति हुई है। सहायक ग्रेड 1 के पद में कार्यरत है। 1984 में इनकी जाति गोंड़ होने जाति प्रमाण पत्र जारी किया गया है, किन्तु सर्विस रिकार्ड में कई जगह जाति ईसाई लिखा है इस आधार पर इनके खिलाफ उच्चस्तरीय जाति छानबीन समिति से शिकायत की गई।

जाति छानबीन समिति ने सुनवाई के अवसर दिए बिना 2010 में इनकी जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया। इसके खिलाफ उन्होंने अधिवक्ता प्रतीक शर्मा के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। याचिका में कहा गया कि शिकायतकर्ता से कोई शपथ पत्र नहीं लिया गया नही जाति की जांच की गई।

याचिकर्ता को पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया। इस आधार पर कोर्ट ने जाति प्रमाण पत्र निरस्त करने के आदेश को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट के आदेश के बाद उसी शिकायत के आधार पर यजीककर्ता की दूसरी बार जाति की जांच कर प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया। इसके खिलाफ अधिवक्ता प्रतीक शर्मा के माध्यम से फिर से याचिका दाखिल की। याचिका में कहा गया कि जाति संबंध शिकायतों की जांच के लिए 2013 में नया नियम बनाया गया है।

इसमें शपथ पत्र के साथ शिकायत होनी चाहिए। जिला स्तरीय जाति छानबीन समिति जांच करेगी। इसके बाद उच्चस्तरीय जाति छानबीन समिति को रिपोर्ट देगी। उच्चस्तरीय समिति दोनों पक्षो को सुनने के बाद निर्णय देगी। इस मामले में किसी भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। जस्टिस आरसीएस सामन्त ने सुनवाई के बाद याचिकर्ता के खिलाफ जाति प्रमाण पत्र निरस्त करने के आधार पर कोई भी करवाई करने पर रोक लगाई है।

Posted By: anil.kurrey