Highcourt News Bilaspur: मध्य प्रदेश राज्य परिवहन निगम के पूर्व व वर्तमान प्रबंध संचालक को हाई कोर्ट का अवमानना नोटिस

Updated: | Sat, 25 Sep 2021 09:08 PM (IST)

बिलासपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)।Highcourt News Bilaspur: मध्य प्रदेश राज्य परिवहन निगम के पूर्व व वर्तमान प्रबंध संचालक की मुसीबत बढ़ गई है। दोनों अफसरों पर न्यायालयीन आदेशों की अवहेलना का आरोप लगा है। अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को 12 नवंबर को हाई कोर्ट के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने दोनों अफसरों के खिलाफ 25 हजार स्र्पये का जमानती वारंट भी जारी किया है। बिलासपुर जिला मुख्यालय निवासी उमाशंकर शर्मा ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में पूर्व में याचिका दायर कर परिवहन अफसरों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी कि देयकों का भुगतान नहीं किया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने इस बात की भी जानकारी दी थी कि वे सेवानिवृत हो गए हैं और बार-बार एक ही काम के लिए आने जाने में आर्थिक क्षति भी हो रही है।

मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने मप्र राज्य परिवहन निगम की तत्कालीन प्रबंध संचालक शैलबाला मार्टिन को वर्ष 2019 में बकाया देयक का भुगतान 90 दिनों में करने का निर्देश दिए थे। हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी आजतक भुगतान नहीं किया गया है। उमाशंकर शर्मा ने वकील विवेक अग्रवाल के जरिए मप्र राज्य परिवहन निगम के पूर्व एवं वर्तमान प्रबंध संचालक सुदामा प्रसाद खांडेय पर न्यायालयीन आदेशों की अवहेलना का आरोप लगाते हुए अवमानना याचिका दायर की है।

अवमानना याचिका पर जस्टिस पी सैम कोशी की एकलपीठ में सुनवाई हुई। जस्टिस कोशी ने मप्र राज्य परिवहन निगम के वर्तमान व पूर्व प्रबंध संचालक को अवमानना नोटिस जारी करते हुए 12 नवंबर को उपस्थित होने के निर्देश दिए हंै। दोनों अधिकारियों को 25 हजार स्र्पये का जमानती वारंट भी जारी किया है।

पूर्ववर्ती सरकार ने कर दिया था भंग

छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद तत्कालीन राज्य सरकार ने छत्तीसगढ राज्य परिवहन निगम को भंग कर दिया था। यहां कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों को राज्य शासन के अलग-अलग विभागों में मर्ज कर दिया था। उमाशंकर शर्मा को नगर निगम में समायोजित किया गया था। सेवानिवृति के बाद देयकों का भुगतान मप्र राज्य परिवहन निगम द्वारा नहीं किया जा रहा है।

Posted By: anil.kurrey