Highcourt News in Bilaspur: झीरम घाटी हत्याकांड: आपराधिक प्रकरण हस्तांतरित करने का नहीं है अधिकार

Updated: | Thu, 16 Sep 2021 08:20 PM (IST)

बिलासपुर।Highcourt News in Bilaspur: झीरम हत्याकांड में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) के बाद पुलिस द्वारा षड़यंत्र व हत्या का अपराध दर्ज करने के मामले को चुनौती देने वाली याचिका पर अंतिम सुनवाई के दौरान गुस्र्वार को भी बहस जारी रही। एनआइए की बहस पूरी होने के बाद हस्तक्षेपकर्ता के अधिवक्तााओं ने तर्क दिया। उन्होंने कहा कि आपराधिक प्रकरण को हस्तांतरित करने का अधिकार एनआइए कोर्ट को नहीं है। सामान्य अपराधों की जांच का अधिकार राज्य पुलिस को होता है। इस मामले में शुक्रवार को भी बहस जारी रहेगी।

इस प्रकरण की सुनवाई अब निर्णायक दौर में है। जस्टिस मनींद्र मोहन श्रीवास्तव व जस्टिस विमला सिंह कपूर की युगलपीठ में बुधवार से इस प्रकरण में अंतिम सुनवाई चल रही है।

इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के एडिशनल सालिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी व हाई कोर्ट के असिस्टेंट सालिसिटर जनरल रमाकांत मिश्रा ने तर्क रखे। उन्होंने एनआइए कोर्ट के अधिकारों के संबंध में तर्क दिया। साथ ही बताया कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 91 व एनआइए एक्ट की धारा 11 से 16 मे वर्णित एनआइए कोर्ट के अधिकार नए आपराधिक प्रकरण स्थानांतरित करने के लिए पर्याप्त है।

उनकी बहस पूरी होने के बाद हस्तक्षेपकर्ता व पुलिस में आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने वाले जितेंद्र मुदलियार की तरफ से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव व संदीप दुबे ने बहस की। जितेंद्र के पिता स्व. उदय मुदलियार झीरम घाटी में शहीद हुए थे। अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि सामान्य रूप से अपराधों की जांच का अधिकार राज्य पुलिस को होता है। लेकिन एनआइए एक्ट इसका अपवाद है।

आतंकवादी एवं अन्य संबंधित अपराधों के लिए केंद्र सरकार की एजेंसी एनआइए को भी जांच सौंपी जाती है। चूंकि यह अधिनियम सिर्फ चुनिंदा धाराओं पर लागू होता है। इसलिए झीरम घाटी हमले के वृहद षड़यंत्र की जांच के लिए दर्ज एफआइआर शेड्यूल अफेंस में नहीं आती। न ही इस आपराधिक प्रकरण को एनआइए को हस्तांतरित करने का कोई आदेश केंद्र सरकार ने जारी किया है।

जैसा कि एनआइए एक्ट के प्रविधान के तहत आवश्यक है। यहां तक कि धारा 8 में वर्णित अन्य अपराध तब ही प्रभावशील होंगे। जब दोनों ही आपराधिक प्रकरण में अभियुक्त समान हो। जगदलपुर स्थित एनआइए के विशेष कोर्ट को भी इस प्रकरण को स्थानांतरित करने का अधिकार नहीं है। गुस्र्वार को जितेन्द्र मुदलियार की ओर से बहस अभी अधूरी है। लिहाजा शुक्रवार को भी बहस जारी रहेगी। उनकी बहस के बाद राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आलोक बख्शी और उपमहाधिवक्ता मतीन सिद्दिकी तर्क रखेंगे।

Posted By: anil.kurrey