Bilaspur News: जिस गांव में रहते हैं दो हजार लोग राजस्व विभाग ने बता दिया वीरान गांव

Updated: | Fri, 22 Oct 2021 08:49 AM (IST)

बिलासपुर। Bilaspur News: राजस्व विभाग की लापरवाही कहें या फिर विभागीय कामकाज का ऐसा ही ढर्रा। जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम महुआडीह को राजस्व दस्तावेज में वीरान गांव बता दिया है। हकीकत कुछ और ही है। इस गांव में 173 परिवार में 1943 लोग निवासरत हैं। वर्ष 2011 की जनगणना में गफलत के कारण ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही है। परेशान ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में गुहार लगाई है।

गुस्र्वार को डिवीजन बेंच में सुनवाई के दौरान केंद्र व राज्य शासन ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। याचिकाकर्ता को प्रत्युत्तर (रिज्वाइंडर) पेश करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। ग्राम महुआडीह निवासी रामाधार पटेल,तुलाराम तथा राजेंद्र पटेल ने वकील अनूप मजूमदार के जरिए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता ग्रामीणों ने अपनी याचिका में कहा है कि वर्ष 2011की जनगणना रिपोर्ट के अनुसार ग्राम महुआडीह को वीरान दिखाया गया है। जबकि हकीकत कुछ और ही है।

याचिकाकर्ता ग्रामीणों ने बताया कि गांव 173 परिवार के 1945 व्यक्ति निवासरत है। याचिका के अनुसार स्वास्थ्य तथा महिला बाल विकास विभाग की फील्ड रिपोर्ट के अनुसार मोहुआडीह की जनसंख्या 1945 है। इस ग्राम को निकटतम ग्राम सलियाडीह पर निर्भर बताया जा रहा है तथा महुआडीह की जनसंख्या को सलियाडीह ग्राम में दिखाया जा रहा है। उपरोक्त त्रुटि के कारण ग्राम मोहुआडीह को ग्राम पंचायत का दर्जा प्राप्त नहीं हो सका है। इसके अलावा सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल रहा है। सलियाडीह ग्राम में व्यय हो जा रहा है। राजस्व दस्तावेजों में वीरान गांव के रूप में शामिल होने के कारण बीते तीन दशक से विकास ही नहीं हो पा रहा है। विकास कार्य पूरी तरह बाधित है।

जनहित याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने केंद्र व राज्य शासन के अलावा रजिस्ट्रार जनगणना व कलेक्टर जांजगीर-चांपा को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने का निर्देश दिया था। डिवीजन बेंच ने राज्य शासन से यह भी पूछा था कि राजस्व विभाग ने इस त्रुटि को सुधारा क्यों नहीं और केंद्र सरकार के संज्ञान में यह विषय क्यों नहीं लाया गया।

केंद्र व राज्य शासन ने पेश किया जवाब

गुस्र्वार को जनहित याचिका की सुनवाई चीफ जस्टिस एके गोस्वामी व जस्टिस गौतम भादुड़ी के डिवीजन बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान केंद्र व राज्य शासन ने अपने विधि अधिकारियों के जवाब पेश कर दिया है। याचिकाकर्ता ने रिज्वाइंडर पेश करने समय मांगा। इस पर डिवीजन बेंच ने तीन सप्ताह का समय दिया है। अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने तीन सप्ताह बाद की तिथि तय कर दी है।

Posted By: sandeep.yadav