भागवत कथा के श्रवण से मिलती है मुक्ति

Updated: | Tue, 30 Nov 2021 05:10 PM (IST)

बिलासपुर । भागवत कथा के श्रवण से भव सागर से मुक्ति मिल जाती है। उक्त बातें लोरमी र्ड क्रमांक तेरह राम्हेपुर में श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञानयज्ञ में कथावाचक राजपुरोहित पं. दिनेशचंद्र तिवारी ने कही।

उन्होंने कहा कि भागवत कथा के श्रवण से भटके हुए जीवांे को भी सदगति मिल जाती है। जीवित की कौन कहे इसकी कथा के श्रवण से प्रेत पितर तक की सदगति होती है। इसका प्रमाण भागवतजी की कथा से प्राप्त होता है। इसमें धुंधुकारी जैसे भटकते जीव की सदगति प्रत्यक्ष देखी गई है।

भागवत श्रवण से भक्ति की भी प्राप्ति होती है और भक्ति समस्त सुखों की खान है । भक्ति से संपन्न्ता मिले नहीं मिले वह हमें सन्मति अवश्य प्रदान करती है। श्रीमद् भागवत में सभी अवतारों की कथा है विभिन्न् नर नारियों की कथा है ,पर जैसे रत्नजड़ित अंगूठी में सोना होने पर भी उसका सारभूत पदार्थ रत्न होता है और जिस तरह सभी नदियों का लक्ष्य सागर है उसी तरह सब कथाओं का सार और लक्ष्य श्रीकृष्णचरित है। श्रीकृष्ण लीला जैसे ही कानों में पड़ती है श्रवणकर्ता के पाप ताप, संताप उसी क्षण कम होने लग जाते हैं।

महाभारत के श्रीकृष्ण तो महान राजनीतिज्ञ और ज्ञान गंभीर गुरु हैं। वही भागवत के श्रीकृष्ण जन साधारण के श्रीकृष्ण है जिन्हें जनता आत्मीय समझती है जिन्हें जनता प्रेम करती है, यहां वे बाल गोपाल हैं मल्ल है , माखनचोर हैं । गोप ग्वाल के साथ बड़ी सहजता और सरलता से मिलते है ,खेलते हैं किसी प्रकार की उनसे दूरी नहीं। कथा क्रम में उन्होंने बताया की भगवान की भक्ति के सभी अधिकारी हैं। कोई किसी भी जाति का हो , उसके अब तक कितने ही नीच आचरण हों , भगवान के शरण होकर उनकी भक्ति करने से शीघ्र ही वह पवित्र हो जाता है।

प्रत्येक मनुष्य को चाहिए कि वह अपने जीवन को भजनमय बनाने की चेष्टा करे। श्रीमद्भागवत कथा को सफल बनाने आयोजक जितेंद्र निर्मलकर,निकिता निर्मलकर , धनेश्वरी निर्मलकर परसराम,राधेश्याम, किशोर, अश्वनी, राजकुमारी अन्य शामिल रहे।

Posted By: Yogeshwar Sharma